अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अदालत से बड़ा झटका लगा है। ‘ICC Sanctions Judge Blocks’ मामले में न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के अमेरिकी जिला जज जेसी फर्मन ने 13 अक्टूबर को प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी कर ट्रंप प्रशासन को दो संगठनों — डेमोक्रेसी फॉर द अरब वर्ल्ड नाउ (DAWN) और टैक्सपेयर्स अलायंस अगेंस्ट जेनोसाइड (TAAG) — के खिलाफ ICC प्रतिबंध लागू करने से रोक दिया।
जज फर्मन ने कहा कि कार्यकारी आदेश संभवतः इन समूहों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह सामग्री के आधार पर संवाद को प्रतिबंधित करता है। इस फैसले से ICC को सबूत सौंपने या प्रतिबंधित फिलिस्तीनी अधिकार समूहों और संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ से जुड़ने पर 3,77,700 डॉलर तक के नागरिक जुर्माने और 20 साल तक की आपराधिक सज़ा का खतरा टल गया है।
ICC Sanctions Judge Blocks: फैसले का दायरा सीमित
हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर पूरे प्रतिबंध तंत्र को ही खारिज करने से इनकार कर दिया। यानी यह राहत सिर्फ DAWN और TAAG तक सीमित है। ‘DAWN et al. v. Trump et al.’ नाम के इस मामले में दी गई निषेधाज्ञा अस्थायी है, लेकिन दोनों संगठनों के लिए इसे बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, जज ने यह माना कि सरकार किसी संगठन को सिर्फ इसलिए दंडित नहीं कर सकती कि वह अंतरराष्ट्रीय अदालत के साथ कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर रहा है। यही तर्क निषेधाज्ञा की नींव बना।
पृष्ठभूमि: ट्रंप का कार्यकारी आदेश 14203
दरअसल, ट्रंप ने फरवरी 2025 में कार्यकारी आदेश 14203 जारी कर ICC की उन जांचों पर प्रतिबंधों को अधिकृत किया था, जिनमें अमेरिका और उसके सहयोगी — जिनमें इज़राइल भी शामिल है — निशाने पर थे। प्रशासन ने ICC के पूर्व अभियोजक करीम खान और छह जजों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के कर्मियों को भी निशाना बनाया था।
9 अक्टूबर 2026 को अमेरिका ने ICC पर ताज़ा प्रतिबंध तब लगाए, जब नोबेल शांति पुरस्कार पूर्व ICC जज नवानेथम पिल्लै को मिला था। इसके कुछ ही घंटों बाद विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संपत्ति जब्त करने (asset freeze) की घोषणा की। आलोचकों ने इसे अंतरराष्ट्रीय अदालत को डराने-धमकाने की कोशिश बताया था।
अब आगे क्या? दोनों संगठनों का बड़ा ऐलान
फैसले के बाद दोनों संगठनों ने कहा है कि वे ICC को फिर से सबूत सौंपना शुरू करेंगे — रोम संविधि के अनुच्छेद 15 के तहत — और अल्बानीज़, अल-हक, अल मेज़ान तथा फिलिस्तीनी मानवाधिकार केंद्र के साथ सहयोग बहाल करेंगे।
असल में, प्रतिबंधों के डर से ये संगठन महीनों से ICC के साथ अपना काम रोककर बैठे थे। अब अदालत की रोक के बाद उनके लिए कानूनी प्रक्रिया में हिस्सा लेने का रास्ता खुल गया है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकता है।
इस बीच, मानवाधिकार संगठनों ने फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ICC के साथ सहयोग करना कोई अपराध नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था का हिस्सा है। आने वाले महीनों में इस मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नज़र रहेगी।
जानकारों का मानना है कि यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विदेश नीति के बीच चल रही लड़ाई में एक अहम मोड़ है। अगर निषेधाज्ञा बरकरार रहती है, तो यह भविष्य में ऐसे प्रतिबंधों के इस्तेमाल पर भी अंकुश लगा सकती है।















