उत्तरकाशी जिले में शुक्रवार शाम भालू के एक जानलेवा हमले से हड़कंप मच गया। तहसील बड़कोट के ग्राम तियाँ के समीप रास्ते में चल रहे रणवीर सिंह पर भालू ने अचानक हमला बोल दिया, जिसमें वे बुरी तरह लहूलुहान हो गए। Uttarkashi Bear Attack की इस घटना के बाद उन्हें नाजुक हालत में प्राथमिक उपचार देकर हेलीकॉप्टर से राजकीय दून चिकित्सालय देहरादून रेफर किया गया है। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र उत्तरकाशी से मिली आधिकारिक सूचना के अनुसार, हमला शाम करीब 4:30 बजे हुआ।
बताया जा रहा है कि भालू के पंजों और दांतों से बुरी तरह जख्मी हुए रणवीर सिंह की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े, तब जाकर जंगली जानवर जंगल की ओर भागा। परिजनों और ग्रामीणों ने लहूलुहान अवस्था में उन्हें तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कफनौल पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की सलाह पर प्रशासन ने उन्हें हैली सेवा के माध्यम से देहरादून रेफर कर दिया। घटना के बाद बड़कोट तहसील और वन विभाग की टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है।
आपदा बुलेटिन में वन्यजीव संघर्ष का खौफनाक आंकड़ा
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (यूएसडीएमए) द्वारा शुक्रवार शाम जारी आपदा बुलेटिन में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। प्रदेश में आपदा से हुई कुल 69 मौतों में से 16 मौतें अकेले मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण हुई हैं, जबकि 76 घायलों में से 26 लोग जंगली जानवरों के हमले का शिकार बने हैं। ये आंकड़े पर्वतीय इलाकों में इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं। असल में, आपदा की राज्य सूची में वन्यजीव हमलों को भी शामिल किया गया है, जिससे इस संकट की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ों में सर्दियां शुरू होते ही भोजन और पानी की तलाश में भालू और गुलदार बस्तियों व पैदल रास्तों का रुख करते हैं। वन क्षेत्र से सटे रास्तों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से खेतों और पगडंडियों पर चलना जोखिम भरा हो गया है, खासकर सुबह-शाम के समय जब जंगली जानवर सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।
निगरानी बढ़ी, मौसम की भी चेतावनी
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जंगलों से सटे मार्गों पर अकेले निकलने से बचें और सतर्कता बरतें। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि संवेदनशील रास्तों पर नियमित गश्त बढ़ाई जाए और आबादी के करीब दिखने वाले खतरनाक जानवरों को पकड़कर दूर छोड़ा जाए। दूसरी तरफ, उसी आपदा बुलेटिन में टिहरी बांध को लेकर भी जानकारी दी गई है। शाम 4:00 बजे टिहरी बांध का जलस्तर 829.42 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के 830 मीटर के स्तर से महज 0.58 मीटर नीचे है। बांध से 6475 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। इसके साथ ही मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और चम्पावत में बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाओं की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों को खराब मौसम में पक्के मकानों में रहने की हिदायत दी है।









