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Uttarakhand Skill Centres Audit: स्किल सेंटरों का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट, मुख्य सचिव का सख्त फरमान

On: October 16, 2026 11:13 PM
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Uttarakhand Skill Centres Audit
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उत्तराखंड में युवाओं को हुनरमंद बनाने के नाम पर केवल कागजी प्रमाणपत्र बांटने के ढर्रे पर अब शासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। Uttarakhand Skill Centres Audit के तहत मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के सभी सरकारी व निजी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता परखने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा। साथ ही राज्य स्तर पर नया स्टेट स्किल डेवलपमेंट प्लान तैयार हो रहा है, जिसका सीधा मकसद ट्रेनिंग को उद्योगों की सीधी भर्ती से जोड़ना है।

शासन ने साफ कर दिया है कि जिन संस्थानों की ट्रेनिंग तय मानकों पर खरी नहीं उतरेगी, उन पर सीधी कार्रवाई होगी। कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग, उद्योग जगत और निजी प्रशिक्षण प्रदाताओं के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सख्त सवाल उठाए और कहा कि कौशल विकास का लक्ष्य केवल प्रमाणपत्र थमाना नहीं, बल्कि युवाओं को फैक्ट्रियों और कंपनियों की मौजूदा मांग के मुताबिक तैयार करना है।

Uttarakhand Skill Centres Audit: सर्टिफिकेट बांटने वाले सेंटरों की होगी जांच

प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए न्यूनतम मानक तय किए जा रहे हैं। थर्ड पार्टी ऑडिट के जरिए यह जांचा जाएगा कि सेंटरों में लैब, ट्रेनर और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण का स्तर उद्योगों के काम का है या नहीं। यानी अब सिर्फ कागजों पर चल रहे सेंटरों की पोल खुलना तय माना जा रहा है।

बैठक में सीआईआई उत्तराखंड के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, निदेशक गौरव लांबा और बजाज इंजीनियरिंग स्किल्स ट्रेनिंग सेंटर के डॉ. सचिन शर्मा ने उद्योग जगत की अपेक्षाएं रखीं। उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्हें ऐसे प्रशिक्षित युवा चाहिए जो फैक्ट्री के फ्लोर पर उतरते ही काम संभाल सकें।

उद्योगों की मांग और पुरानी ट्रेनिंग में बड़ा अंतर

राज्य में अब तक चल रहे कई पारंपरिक कोर्स उद्योगों की नई तकनीक से मेल नहीं खा रहे हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस अंतर को पाटने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ सीधा समन्वय बनाया जाए। नए पाठ्यक्रमों को डिजाइन करने में राज्य के थिंक टैंक सेतु (SETU) आयोग के अध्ययन की मदद ली जाएगी।

आयोग ने राज्य में उभरते हुए कौशल क्षेत्रों और औद्योगिक निवेश के अनुसार नए मानव संसाधन की जरूरत पर जो रिपोर्ट दी है, उसे सीधे ट्रेनिंग मॉड्यूल में शामिल किया जाएगा। सचिव सी. रविशंकर, श्रीधर बाबू अद्दांकी और अपर सचिवों की मौजूदगी में यह तय हुआ कि जिन औद्योगिक क्षेत्रों में कुशल कामगारों की भारी कमी है, वहां तत्काल नए विशिष्ट कोर्स शुरू किए जाएं।

हर जिले का स्किल प्लान अब पोर्टल पर दिखेगा

प्रशासनिक मनमानी और कागजी दावों को खत्म करने के लिए मुख्य सचिव ने सभी जिलों को अपनी कार्ययोजना सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। हर जनपद का डिस्ट्रिक्ट स्किल डेवलपमेंट प्लान तुरंत तैयार कर आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार, युवाओं की रुचि और ट्रेनिंग सुविधाओं का सही आंकड़ा जनता और प्रशासन के सामने रहेगा।

इस पारदर्शी व्यवस्था से पहाड़ के दूरदराज जिलों में स्थानीय स्वरोजगार और उद्योगों की जरूरत के हिसाब से युवा तैयार हो सकेंगे, जिससे रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।

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