इनकम टैक्स को लेकर ज्यादातर लोगों की समझ यही है कि साल के अंत में रिटर्न भरते समय टैक्स चुका दिया जाता है। लेकिन असल में टैक्स व्यवस्था इससे अलग काम करती है — कमाई के साथ-साथ टैक्स भी किस्तों में चुकाना होता है। इसी व्यवस्था का नाम है advance tax यानी अग्रिम कर, और इसे तय समय पर न भरने पर ब्याज और पेनल्टी भी लग सकती है।
दरअसल, सरकार चाहती है कि टैक्स का पैसा साल भर में नियमित रूप से खजाने में आता रहे, न कि सिर्फ मार्च के महीने में। इसलिए जिन लोगों की टैक्स देनदारी एक तय सीमा से ज्यादा बनती है, उन्हें साल के दौरान ही किस्तों में टैक्स जमा करना होता है। यह नियम सैलरीड और बिजनेस — दोनों तरह के करदाताओं पर अलग-अलग तरीके से लागू होता है।
Advance Tax कौन भरे और कौन नहीं
अगर किसी वित्तीय वर्ष में आपकी कुल टैक्स देनदारी एक तय सीमा से ज्यादा है तो आपको एडवांस टैक्स भरना होगा। सैलरीड कर्मचारियों की सैलरी से आमतौर पर नियोक्ता हर महीने TDS काट लेता है, इसलिए अगर उनकी कोई अन्य बड़ी आय नहीं है तो उन्हें अलग से एडवांस टैक्स नहीं भरना पड़ता — उनका टैक्स पहले ही कट चुका होता है।
लेकिन फ्रीलांसर, बिजनेस करने वाले, दुकानदार, किराये से आय पाने वाले या निवेश से पूंजीगत लाभ कमाने वाले लोगों को यह टैक्स खुद किस्तों में जमा करना होता है। वरिष्ठ नागरिकों को इसमें राहत मिली हुई है — अगर उनकी बिजनेस से आय नहीं है तो उन्हें एडवांस टैक्स नहीं भरना पड़ता। अपनी आय के स्रोतों का हिसाब लगाकर ही तय करें कि यह नियम आप पर लागू होता है या नहीं।
किस्तों का शेड्यूल कैसे तय होता है
एडवांस टैक्स साल में चार किस्तों में जमा किया जाता है। पहली किस्त जून में, दूसरी सितंबर में, तीसरी दिसंबर में और आखिरी किस्त मार्च में तय तारीख तक भरनी होती है। हर किस्त में साल भर के अनुमानित टैक्स का एक तय हिस्सा जमा करना होता है — शुरुआत में कम और साल के अंत तक पूरा टैक्स कवर हो जाना चाहिए।
टैक्स का भुगतान ऑनलाइन किया जा सकता है — आयकर विभाग की वेबसाइट पर निर्धारित चालान के जरिए नेटबैंकिंग या डेबिट कार्ड से। किस्त भरते समय अपनी कुल अनुमानित आय और अब तक कटे TDS का हिसाब जरूर मिला लें, ताकि न जरूरत से ज्यादा टैक्स जाए और न ही कम। सही आकलन ही पेनल्टी से बचने की पहली सीढ़ी है।
पेनल्टी से बचने के लिए क्या करें
एडवांस टैक्स समय पर न भरने या तय हिस्से से कम भरने पर आयकर कानून के तहत ब्याज लग सकता है। यह ब्याज बकाया रकम पर हर महीने के हिसाब से जुड़ता जाता है, इसलिए देरी जितनी लंबी होगी, बोझ उतना ही भारी पड़ेगा।
बचने का सबसे आसान तरीका है — साल की शुरुआत में ही अपनी अनुमानित आय का हिसाब लगाएं और हर किस्त की तारीख डायरी या फोन में नोट कर लें। अगर बीच में आय बढ़ जाए तो अगली किस्त में अंतर की रकम जोड़कर भर दें। आखिरी किस्त तक पूरा टैक्स चुका देने पर पेनल्टी का डर खत्म हो जाता है और रिटर्न भरते समय भी कोई झंझट नहीं रहता।
एडवांस टैक्स कोई अतिरिक्त बोझ नहीं, बल्कि साल भर में बंटा हुआ वही टैक्स है जो आपको देना ही है। समय पर किस्तें भरकर आप न सिर्फ पेनल्टी और ब्याज से बचते हैं, बल्कि मार्च के महीने में एकमुश्त बड़ी रकम जुटाने के तनाव से भी मुक्त रहते हैं। टैक्स की योजना साल की शुरुआत में बनाएं — आखिरी समय की भागदौड़ से हमेशा बेहतर नतीजे मिलते हैं।















