रिटायरमेंट की तैयारी में नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस आज सबसे भरोसेमंद विकल्पों में गिना जाता है। इसमें जमा पैसा लंबी अवधि तक बढ़ता रहता है और बुढ़ापे में नियमित पेंशन का सहारा बनता है। लेकिन जिंदगी हमेशा योजना के मुताबिक नहीं चलती। बच्चों की पढ़ाई, गंभीर बीमारी या घर जैसी बड़ी जरूरत अचानक सामने आ जाए तो क्या एनपीएस में जमा पैसा काम आ सकता है? इस सवाल का जवाब NPS partial withdrawal rules में छिपा है, जिन्हें हर खाताधारक को समझना चाहिए।
दरअसल एनपीएस को रिटायरमेंट तक के लिए डिजाइन किया गया है, इसलिए इसमें से पैसा निकालने पर सख्त नियम लागू होते हैं। फिर भी नियमों में आंशिक निकासी यानी partial withdrawal का प्रावधान रखा गया है, ताकि किसी बड़ी जरूरत के समय खाताधारक अपने ही पैसे का एक हिस्सा इस्तेमाल कर सके। यह सुविधा सोच-समझकर बनाई गई है, ताकि रिटायरमेंट का पूरा फंड एक झटके में खत्म न हो जाए।
NPS Partial Withdrawal Rules: किन शर्तों पर मिलती है निकासी की इजाजत
आंशिक निकासी हर किसी को हर समय नहीं मिलती। इसके लिए खाताधारक की सदस्यता की एक निश्चित अवधि पूरी होनी चाहिए। यानी खाता खोलने के तुरंत बाद आप पैसा नहीं निकाल सकते। इसके अलावा निकासी केवल अपने योगदान पर ही की जा सकती है, नियोक्ता की ओर से जमा राशि पर नहीं। निकासी की संख्या भी सीमित रखी गई है, ताकि इस सुविधा का दुरुपयोग न हो और रिटायरमेंट कॉर्पस सुरक्षित बना रहे।
एक और अहम शर्त यह है कि निकासी किसी तय कारण के लिए ही की जा सकती है। बिना वजह पैसा निकालने की इजाजत नहीं है। आवेदन के साथ कारण से जुड़े दस्तावेजी प्रमाण भी देने होते हैं। यानी यह सुविधा इमरजेंसी के लिए है, शौक पूरे करने के लिए नहीं।
किन जरूरतों के लिए एनपीएस से पैसा निकाल सकते हैं
नियमों के तहत कुछ खास परिस्थितियों में आंशिक निकासी की अनुमति है। इनमें बच्चों की उच्च शिक्षा, बच्चों की शादी, गंभीर बीमारी का इलाज, घर खरीदना या बनाना और खुद का व्यवसाय शुरू करना शामिल है। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में स्वयं के अलावा पति या पत्नी, बच्चों और माता-पिता के इलाज के लिए भी पैसा निकाला जा सकता है।
हर कारण के लिए अलग तरह के प्रमाण मांगे जाते हैं। जैसे पढ़ाई के लिए कॉलेज का प्रवेश पत्र या फीस की रसीद, इलाज के लिए अस्पताल के दस्तावेज। इसलिए आवेदन से पहले जरूरी कागजात तैयार रखना समझदारी होती है। अधूरे दस्तावेजों पर आवेदन अटक सकता है और प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
आंशिक निकासी के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
असल में प्रक्रिया काफी हद तक डिजिटल हो चुकी है। खाताधारक सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी के पोर्टल या अपने पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। फॉर्म में निकासी का कारण चुनना होता है, जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं और बैंक खाते का विवरण सत्यापित करना होता है।
आवेदन मंजूर होने के बाद राशि सीधे खाताधारक के बैंक खाते में भेज दी जाती है। निकासी पर कर का क्या असर होगा, यह मौजूदा कर नियमों पर निर्भर करता है, इसलिए बड़ी राशि निकालने से पहले कर सलाहकार से राय लेना बेहतर रहता है।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि साठ वर्ष की आयु के बाद निकासी के नियम अलग होते हैं। उस समय एक तय सीमा तक एकमुश्त राशि ली जा सकती है और शेष राशि से पेंशन यानी एन्युटी खरीदना अनिवार्य होता है। आंशिक निकासी और अंतिम निकासी दोनों के नियम अलग-अलग हैं, इन्हें आपस में मिलाना सही नहीं होगा।
कुल मिलाकर आंशिक निकासी की सुविधा एक सुरक्षा कवच की तरह है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ वास्तविक जरूरत में ही करना चाहिए। बार-बार पैसा निकालने से रिटायरमेंट के समय मिलने वाली राशि घट जाती है। समझदार रणनीति यही है कि पहले अपना इमरजेंसी फंड बनाएं और एनपीएस को अंतिम विकल्प के तौर पर रखें।















