अमेरिकी न्याय विभाग ने 21 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 के बीच कई संघीय जिला अदालतों में 40 प्राकृतिक नागरिकों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई दायर की है। Trump DOJ denaturalization अभियान के तहत यह ट्रंप प्रशासन में एक ही अवधि में दायर की गई अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंश ने इसे ‘आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा डिनेचुरलाइजेशन प्रयास’ करार दिया है।
इन 40 लोगों पर जासूसी, विदेशी सरकार के एजेंट के रूप में काम करने, स्वैच्छिक मानववध, विशेष आवश्यकता वाले व्यक्ति के खिलाफ गंभीर यौन अपराध, नाबालिगों के यौन शोषण, आव्रजन धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, विवाह धोखाधड़ी, फर्जी पहचान बनाने और छिपाए गए निर्वासन आदेश जैसे गंभीर आरोप हैं। इन आरोपियों की उम्र 26 से 76 साल के बीच है। 11 आरोपी मेक्सिको से आए हैं- यह सबसे बड़ा समूह है। बाकी आरोपी चीन, मिस्र, पाकिस्तान और सिएरा लियोन जैसे देशों से हैं।
Trump DOJ denaturalization: ‘इन सभी ने झूठ बोलकर नागरिकता ली’
न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के सहायक अटॉर्नी जनरल ब्रेट शुमेट ने कहा, ‘इनमें से हर एक व्यक्ति ने अमेरिकी नागरिकता में झूठ बोलकर घुसपैठ की।’ संघीय कानून के तहत प्राकृतिक नागरिकता तभी रद्द की जा सकती है, जब वह अवैध तरीके से हासिल की गई हो या छिपाव व जानबूझकर गलत जानकारी देकर प्राप्त की गई हो। अहम बात यह है कि ये सभी मामले दीवानी अदालतों में चल रहे हैं- यानी इन 40 लोगों की नागरिकता अभी रद्द नहीं हुई है, प्रक्रिया जारी है। कानून के मुताबिक अगर यह साबित हो जाए कि नागरिकता छिपाव या जानबूझकर दी गई गलत जानकारी के आधार पर ली गई थी, तो अदालत उसे रद्द कर सकती है। हालांकि यह प्रक्रिया दीवानी है, इसलिए इसमें आपराधिक सजा जैसा फैसला नहीं होता- सिर्फ नागरिकता की वैधता पर फैसला होता है।
आंकड़ों में डिनेचुरलाइजेशन का इतिहास
आंकड़े बताते हैं कि 1990 से 2017 के बीच अमेरिका में औसतन सालाना करीब 11 डिनेचुरलाइजेशन मामले दर्ज होते थे। बाइडन प्रशासन ने अपने चार साल के कार्यकाल में कुल 24 मामले दायर किए थे। वहीं ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2025 से अगस्त के आखिर तक 120 मामले दायर किए और अब अक्टूबर के अंत तक 250 याचिकाओं के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह रफ्तार पहले के किसी भी प्रशासन से कहीं ज्यादा है। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि मौजूदा प्रशासन पिछले प्रशासनों के मुकाबले कहीं ज्यादा आक्रामक तरीके से इस कानून का इस्तेमाल कर रहा है।
क्यों बढ़ रहा है अभियान?
दरअसल ट्रंप प्रशासन आव्रजन पर सख्त रुख के तहत उन मामलों को निशाना बना रहा है, जहां नागरिकता हासिल करने में धोखाधड़ी के आरोप हैं। प्रशासन का तर्क है कि जासूसी और गंभीर अपराधों में लिप्त लोगों को अमेरिकी नागरिकता का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। वहीं आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में कार्रवाइयों से प्राकृतिक नागरिकों में डर का माहौल बन सकता है।
फिलहाल इन 40 मामलों की सुनवाई अलग-अलग संघीय अदालतों में होगी। हर मामले में सरकार को यह साबित करना होगा कि नागरिकता धोखे से हासिल की गई थी। आने वाले महीनों में इन फैसलों पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि ये ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति की दिशा तय करेंगे।















