अमेरिका में सरकार और मीडिया के बीच चल रहा टकराव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी न्याय विभाग ने घोषणा की कि वह देश के पांच बड़े टेलीविजन नेटवर्कों के खिलाफ जांच शुरू कर रहा है — और यह DOJ antitrust investigation व्हाइट हाउस प्रेस पूल के बहिष्कार के फैसले से जुड़ी है। दरअसल, ये वही नेटवर्क हैं जिन्होंने राष्ट्रपति भवन की कवरेज का बायकॉट किया था, जब व्हाइट हाउस ने तीन मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की मान्यता रद्द कर दी थी।
जांच के दायरे में आने वाले नेटवर्क हैं — ABC, CBS, CNN, NBC और Fox News। इस खबर की सबसे पहले जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स ने दी। न्याय विभाग की प्रवक्ता एमिली कोविंग्टन ने कहा, ‘व्यावसायिक प्रतिस्पर्धियों के बीच सामूहिक बहिष्कार शरमन एक्ट का उल्लंघन हो सकता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘एंटीट्रस्ट डिवीजन सिर्फ यह जांच कर रहा है कि क्या इन समाचार संगठनों ने एंटीट्रस्ट कानूनों का उल्लंघन किया है।’
DOJ antitrust investigation: शरमन एक्ट का हवाला क्यों दिया जा रहा है
असल में अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानून प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच मिलीभगत पर नजर रखता है। बताया जा रहा है कि न्याय विभाग का तर्क यह है कि पांचों नेटवर्क ने एक साथ मिलकर कवरेज का बहिष्कार किया, और यही सामूहिक फैसला शरमन एक्ट के दायरे में आ सकता है। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि जांच का निशाना आम व्यापारिक कंपनियां नहीं, बल्कि खबरें प्रसारित करने वाले समाचार संस्थान हैं।
इन पांचों नेटवर्क की एक खास भूमिका भी है। ABC, CBS, Fox News, NBC और CNN मिलकर व्हाइट हाउस का प्राथमिक टेलीविजन पूल बनाते हैं — यानी वे कवरेज की लागत आपस में बांटते हैं, बारी-बारी से कवरेज का आयोजन करते हैं और फुटेज साझा करते हैं। ऐसे में जब इन सभी ने एक साथ कवरेज से दूरी बनाई, तो सरकार ने इसे समन्वित कार्रवाई के तौर पर देखा।
19 सितंबर का वो फैसला, जहां से विवाद शुरू हुआ
दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ 19 सितंबर को है। उस दिन व्हाइट हाउस ने CNN, Politico और MS NOW के पत्रकारों को राष्ट्रपति की कवरेज से रोक दिया और उनकी मान्यता रद्द कर दी। व्हाइट हाउस का कहना था कि राष्ट्रपति की कवरेज करना ‘अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार’ है। इसके बाद इन मीडिया संस्थानों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और पहले संशोधन (First Amendment) के उल्लंघन का आरोप लगाया।
मामले में एक जज ने इन संस्थानों को मंगलवार तक राहत दी है, और तब से टेलीविजन पूल की कवरेज दोबारा शुरू हो गई है। लेकिन इस बीच सरकार का रुख सख्त होता दिख रहा है। न्याय विभाग की जांच इसी बहिष्कार के फैसले को निशाने पर ले रही है, और अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रेस की आज़ादी की लड़ाई को एंटीट्रस्ट कानून के चश्मे से देखा जा सकता है।
पत्रकारों की आज़ादी पर उठे सवाल
पत्रकारों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स ने इस जांच की कड़ी आलोचना की है। संस्था के जोस ज़मोरा ने कहा, ‘सरकार को प्रेस एक्सेस की रक्षा करने वाले समाचार संस्थानों को डराने के लिए एंटीट्रस्ट जांच का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जनता का जानने का अधिकार इसी एक्सेस पर निर्भर करता है।’
दूसरी ओर, जिन नेटवर्कों के खिलाफ जांच चल रही है, उन्होंने फिलहाल टिप्पणी के अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में बढ़ती है — क्योंकि इसका नतीजा अमेरिका में मीडिया और सरकार के रिश्तों की दशा-दिशा तय कर सकता है।















