मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक अन्य
हरिद्वार कुंभ 2027 — उत्तराखण्ड शासन

UPI MDR October 2026: 15 अक्टूबर से ₹2000 से ऊपर के व्यापारी पेमेंट पर 0.4% शुल्क, जानें किसे लगेगा, किसे नहीं

On: October 8, 2026 10:28 PM
Follow Us:
---Advertisement---
वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

15 अक्टूबर 2026 की तारीख़ देश के करोड़ों UPI यूज़र्स के लिए अहम होने वाली है। इस दिन से चुनिंदा व्यापारी लेनदेन (पर्सन-टू-मर्चेंट) पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो जाएगा, बशर्ते पेमेंट ₹2,000 से ऊपर का हो। NPCI की UPI स्टीयरिंग कमेटी ने यह दर तय की है और कहा है कि इससे पेमेंट सिस्टम की मजबूती, साइबर सुरक्षा और विवाद निपटान की व्यवस्था को पैसा मिलेगा।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह शुल्क आखिर देगा कौन। दरअसल, यह शुल्क ग्राहक की जेब से नहीं, बल्कि व्यापारी के हिस्से से कटेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खुद 25 सितंबर को साफ कर चुकी हैं कि 0.4% का यह शुल्क दुकानदार या व्यापारी वहन करेगा, ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा। ₹75,000 या उससे ऊपर के पेमेंट पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा। यानी ₹3,000 के पेमेंट पर ₹12 और ₹10,000 के पेमेंट पर ₹40 का MDR लगेगा।

UPI MDR October 2026 में किसे लगेगा शुल्क और किसे मिलेगी छूट

नए ढांचे के तहत आम आदमी से आम आदमी (P2P) के बीच होने वाले ट्रांसफर पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे रकम कितनी भी हो। दुकानों पर ₹2,000 तक के पेमेंट पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। बताया जा रहा है कि इस तरह करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। छोटे रेहड़ी-पटरी वालों और P2PM खाता इस्तेमाल करने वाले छोटे विक्रेताओं को भी राहत दी गई है — महीने में ₹1 लाख तक की प्राप्ति पर उन्हें कोई MDR नहीं देना होगा।

इतना ही नहीं, सरकार ने साफ किया है कि कोई भी व्यापारी ग्राहक से “UPI सरचार्ज” के नाम पर अलग से पैसा नहीं वसूल सकता। अगर कोई दुकानदार ऐसा करता है, तो उसकी शिकायत की जा सकती है। पेमेंट ऐप्स भी यूज़र्स पर कोई प्लेटफॉर्म फीस नहीं लगा सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार

इस नए ढांचे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी। कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, यानी 15 अक्टूबर से लागू होने की योजना पर अभी कोई ब्रेक नहीं लगा है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार, रिज़र्व बैंक और NPCI से चार हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। याचिका में इस शुल्क के कानूनी आधार और व्यापारियों पर इसके असर को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

उधर, व्यापारी संगठनों और फिनटेक कंपनियों ने NPCI से मांग की है कि इस शुल्क को 1 जनवरी 2027 तक टाल दिया जाए। उनका कहना है कि त्योहारी सीज़न के बीच व्यापारियों में भ्रम की स्थिति है और तैयारी के लिए और समय चाहिए। सूत्रों के मुताबिक NPCI इस पर वित्त मंत्रालय से चर्चा कर रहा है और अगले दो दिनों में फैसला संभव है। इस अनिश्चितता का असर शेयर बाज़ार में भी दिखा — डिजिटल पेमेंट कंपनियों पेटीएम, मोबिक्विक और पाइन लैब्स के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

शून्य शुल्क युग का अंत क्यों

गौरतलब है कि जनवरी 2020 से UPI पर शून्य MDR का दौर चल रहा था, जिससे डिजिटल पेमेंट का जबरदस्त विस्तार हुआ। अब NPCI का कहना है कि बढ़ती लागत और सिस्टम को मजबूत रखने के लिए यह शुल्क ज़रूरी है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हर पेमेंट पर एक जैसी दर नहीं होगी — यूटिलिटी पेमेंट, लोन की ऑटोपे किस्त (फ्लैट ₹5), टेलीकॉम, शिक्षा, ईंधन, रेलवे और बीमा जैसे क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं।

बहरहाल, त्योहारी सीज़न में ऑनलाइन और दुकानों पर खरीदारी करते वक्त उपभोक्ताओं को घबराने की ज़रूरत नहीं है। रोज़मर्रा के छोटे पेमेंट पहले जैसे ही मुफ्त रहेंगे। लेकिन अगर कोई व्यापारी UPI पेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क मांगे, तो जान लीजिए कि यह नियमों के खिलाफ है — और इसकी शिकायत का रास्ता आपके लिए खुला है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment