एलन मस्क और भारत सरकार एक बार फिर आमने-सामने हैं। स्पेसएक्स के संस्थापक मस्क ने 7 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक के रास्ते में “कुछ ऑलिगार्क” रोड़े अटका रहे हैं, ताकि टेलीकॉम बाज़ार पर अपना एकाधिकार बनाए रखा जा सके। मस्क ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की ओर इशारा माना गया, जिनकी कंपनी जियो सैटकॉम भी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के मैदान में है।
अगले ही दिन, यानी 8 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। संचार मंत्रालय ने प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के ज़रिए जारी बयान में कहा कि भारत का सैटेलाइट संचार नियमन ढांचा निष्पक्ष और भेदभाव-रहित है। मंत्रालय के मुताबिक, यह सुझाव कि ढांचा या उसका क्रियान्वयन अनुचित या भेदभावपूर्ण है, “बेबुनियाद और गलत” है।
मस्क ने X पर क्या लिखा था
मस्क ने अपने पोस्ट में कहा कि दुर्भाग्य से स्टारलिंक को कुछ ऑलिगार्कों द्वारा रोका जा रहा है, ताकि भारतीय जनता पर उनका एकाधिकार बना रहे — और इसे उन्होंने “भारतीय जनता के खिलाफ अपराध” तक करार दिया। उनका यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया और भारतीय यूज़र्स के बीच सैकड़ों शेयर और कमेंट्स आए। मस्क ने कहा कि स्टारलिंक ग्रामीण इलाकों में तेज़ और सस्ता इंटरनेट पहुंचा सकता है, जहां मौजूदा नेटवर्क की पहुंच कमज़ोर है।
Starlink India पर सरकार का जवाब — तीनों कंपनियां एक ही कतार में
सरकार ने बताया कि ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस मिला है — स्टारलिंक, रिलायंस की जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती एंटरप्राइजेज समर्थित यूटेलसैट वनवेब। तीनों को गैर-भूस्थिर उपग्रह प्रणालियों से सेवा देने की अनुमति है। लेकिन लाइसेंस की शर्तों के तहत हर कंपनी को सुरक्षा मानकों का पालन साबित करना होगा, ताकि यूज़र्स और उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
मंत्रालय ने साफ किया कि तीनों लाइसेंसधारकों की सुरक्षा जांच फिलहाल चल रही है और तीनों मोटे तौर पर एक ही नियामकीय चरण में हैं। सुरक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई कंपनी स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण में जा सकेगी। यानी किसी को न तो तरजीह दी जा रही है, न ही रोका जा रहा है।
भारत के सैटकॉम बाज़ार में कड़ी टक्कर
दरअसल, भारत का सैटेलाइट संचार बाज़ार इस वक्त दिग्गजों की नज़र में है। स्टारलिंक के अलावा जियो का प्रस्तावित लो-अर्थ ऑर्बिट नेटवर्क, अमेज़न लियो और यूटेलसैट वनवेब भी मैदान में हैं। बताया जा रहा है कि स्पेसएक्स ने भारत में करीब 30,000 उपग्रहों के लिए अधिकृत होने का आवेदन दिया है, जबकि वैश्विक स्तर पर उसकी Gen 2 योजना में लगभग 42,000 उपग्रह शामिल हैं। गौरतलब है कि करीब एक दशक पहले भारतीय टेलीकॉम बाज़ार में उतरे रिलायंस जियो को मोबाइल डेटा की कीमतों में भारी कटौती का श्रेय दिया जाता है।
बहरहाल, मस्क के आरोपों के बाद यह साफ हो गया है कि स्टारलिंक की भारत में एंट्री अब सिर्फ नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने का इंतज़ार कर रही है। सवाल यह है कि सुरक्षा जांच कितनी जल्दी पूरी होती है — क्योंकि स्पेक्ट्रम का रास्ता उसी के बाद खुलेगा। ग्रामीण भारत को तेज़ इंटरनेट का वादा करने वाली इस तकनीक पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।















