मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक अन्य
हरिद्वार कुंभ 2027 — उत्तराखण्ड शासन

Ghana BRICS Membership: ब्रिक्स में शामिल होने के लिए घाना की औपचारिक अर्जी, भारत से मांगा समर्थन

On: October 8, 2026 10:31 PM
Follow Us:
---Advertisement---
वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

अफ्रीकी देश घाना ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। घाना के मंत्रिमंडल ने ब्रिक्स की औपचारिक सदस्यता के लिए आवेदन करने के फैसले को मंजूरी दे दी है। (Ghana BRICS membership)

यह एलान विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडज़ेटो अब्लाक्वा ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को अक्रा में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की आधिकारिक यात्रा के दौरान किया। अब्लाक्वा ने बताया कि घाना ने अपनी अर्जी के लिए पहले ही भारत का समर्थन मांगा है।

Ghana BRICS Membership: जयशंकर की अक्रा यात्रा के दौरान ऐतिहासिक एलान

राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा के मंत्रिमंडल ने फैसला किया है कि घाना को ब्रिक्स में शामिल होने के लिए औपचारिक आवेदन देना चाहिए, अब्लाक्वा ने पत्रकारों से कहा। उन्होंने बताया कि यह कदम घाना के आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश का हिस्सा है। दरअसल, घाना और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024 में करीब 3 अरब डॉलर से बढ़कर अब लगभग 7 अरब डॉलर हो गया है।

जयशंकर ने कहा कि भारत घाना की आकांक्षाओं का समर्थक है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सदस्यता पर पूरे ब्रिक्स समूह को विचार करना होगा। यानी घाना की अर्जी एक प्रक्रिया की शुरुआत है, और अंतिम फैसला समूह के सभी सदस्यों की सहमति पर निर्भर करेगा।

ब्रिक्स की कहानी 2009 में शुरू हुई थी, जब ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने इसे एक आर्थिक मंच के तौर पर खड़ा किया। दक्षिण अफ्रीका 2011 में जुड़ा, और हाल के वर्षों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के शामिल होने से यह समूह ग्लोबल साउथ की सबसे बड़ी आवाज बनता जा रहा है।

ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत

ब्रिक्स की स्थापना ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने की थी; दक्षिण अफ्रीका 2011 में जुड़ा। हाल के वर्षों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी इसमें शामिल हुए हैं। अब्लाक्वा ने कहा कि ब्रिक्स में शामिल होकर घाना को आर्थिक विकल्प मिलेंगे और ग्लोबल साउथ के ढांचे में ज्यादा सहयोग के रास्ते खुलेंगे।

गौरतलब है कि मंत्री ने यह भी साफ किया कि ब्रिक्स की सदस्यता का मतलब पुराने साझेदारों से दूरी नहीं है। घाना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक का सदस्य बना रहेगा। सरकार का मकसद विकास साझेदारियों में ज्यादा विकल्प रखना है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था कुछ ही साझेदारों पर निर्भर न रहे।

अब्लाक्वा ने बताया कि ब्रिक्स की दिलचस्पी सरकार के व्यापक आर्थिक परिवर्तन एजेंडे से जुड़ी है — औद्योगीकरण, रोजगार सृजन और प्राकृतिक संसाधनों से ज्यादा मूल्य जोड़ना। जयशंकर की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए, जो बढ़ते रिश्तों का संकेत है।

जयशंकर ने कहा कि भारत घाना की आकांक्षाओं के प्रति बहुत सहानुभूतिपूर्ण और समर्थक है। घाना ने कहा है कि औपचारिक अर्जी देने से पहले वह ब्रिक्स के अन्य मौजूदा सदस्यों से भी समर्थन मांगेगा, ताकि आवेदन को व्यापक स्वीकृति मिल सके।

बहरहाल, घाना की अर्जी ऐसे समय आई है जब ब्रिक्स लगातार विस्तार कर रहा है और विकासशील देशों के लिए एक वैकल्पिक मंच के रूप में उभर रहा है। अगर अर्जी स्वीकार होती है तो यह पश्चिम अफ्रीका के लिए भी एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम होगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment