मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक अन्य
हरिद्वार कुंभ 2027 — उत्तराखण्ड शासन

India US Trade Deal 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- वार्ता ठहराव पर, रूसी तेल और टैरिफ बने बड़ी अड़चन

On: October 8, 2026 10:30 PM
Follow Us:
---Advertisement---
वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता एक बार फिर अटकता दिख रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस हफ्ते कहा कि दोनों देशों की वार्ता एक ऐसे ठहराव पर पहुंच गई है, जहां से आगे रियायतों की गुंजाइश बहुत कम बची है। (India US trade deal 2026)

दरअसल, सीतारमण की यह टिप्पणी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि समझौता आसन्न नहीं है। ग्रीर ने 1 अक्टूबर को जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के इतर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद यह बात कही थी। दोनों पक्षों ने अभी तक देरी के ठोस कारण सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन पर्दे के पीछे कई पेच फंसे हुए हैं।

India US Trade Deal 2026: रूसी तेल पर 100% टैरिफ की तलवार

सबसे बड़ी अड़चन अमेरिका का नया कानून है, जो रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता खोलता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में गिना जाता है। असल में, 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल की खरीद बढ़ाई है, जिससे मॉस्को को पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना करने में मदद मिली है।

यह नया शुल्क भारत की उस कोशिश के खिलाफ जाता है, जिसके तहत वह वियतनाम और चीन जैसी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर टैरिफ शर्तें चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह ऊर्जा नीति की दुविधा बन गई है — रूसी तेल घटाने से ईंधन महंगा हो सकता है या सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ सकता है, और खरीद जारी रखने से सबसे बड़े बाजार को निर्यात खतरे में पड़ सकता है।

सेक्शन 301 जांच और अटके रिश्ते

समझौते में एक और रुकावट वॉशिंगटन की अधूरी सेक्शन 301 व्यापार जांच है, जिसमें कई देशों पर अत्यधिक औद्योगिक क्षमता के आरोपों की समीक्षा हो रही है। जब तक यह जांच पूरी नहीं होती, यह कहना मुश्किल है कि भारतीय सामानों पर अंतिम टैरिफ क्या होगा। भारतीय निर्यातक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं — खबरों के मुताबिक कुछ अमेरिकी खरीदारों ने थोक ऑर्डर घटा दिए हैं और वैकल्पिक स्रोत तलाश रहे हैं।

गौरतलब है कि फरवरी में दोनों देशों ने एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी, जिसके तहत पिछले अगस्त में लगाए गए 50% दंडात्मक टैरिफ को घटाकर 18% करने की बात थी। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के आपातकालीन टैरिफ अधिकारों को अवैध ठहरा दिया, जिससे 10% की आधार दर लागू हो गई। इस बीच ओमान के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत और पाकिस्तान के साथ युद्धविराम का श्रेय लेने के ट्रंप के दावे को भारत के खारिज करने से रिश्तों में खटास भी आई है।

भारत अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में गिना जाता है और अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष है — यानी भारत अमेरिका को ज्यादा बेचता है, खरीदता कम। वॉशिंगटन इस असंतुलन को कम करना चाहता है, जिससे दोनों तरफ समझौता राजनीतिक रूप से मुश्किल हो गया है। निर्यातकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी टैरिफ की अनिश्चितता है; जब तक अंतिम दर तय नहीं होती, अमेरिकी खरीदार थोक ऑर्डर देने से कतरा रहे हैं।

बहरहाल, वार्ता पूरी तरह टूटी नहीं है। सीतारमण ने कहा कि बातचीत जारी है, और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के इस महीने के आखिर में भारत दौरे से प्रगति की एक और उम्मीद जगी है। लेकिन जानकारों का मानना है कि इस साल समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना अब धुंधली पड़ गई है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment