नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था लागू हुए लगभग नौ वर्ष पूरे होने को हैं और अब इस कर ढांचे में एक अहम सुधार पर विचार चल रहा है। केंद्र सरकार GST अधिकारियों को प्राप्त सीधे गिरफ्तारी करने के अधिकार को समाप्त करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से मंथन कर रही है। इस मुद्दे पर 7 अक्टूबर को होने जा रही GST काउंसिल की बैठक में विस्तार से चर्चा हो सकती है।
यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है तो GST से जुड़े मामलों में कर अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की मौजूदा शक्ति समाप्त हो सकती है। इसके लिए GST कानून में संशोधन आवश्यक होगा, जिसे सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है।
किन मामलों में होती है गिरफ्तारी
वर्तमान GST कानून के अंतर्गत गंभीर कर अपराधों में गिरफ्तारी का प्रावधान मौजूद है। फर्जी बिल जारी करना, अनुचित तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करना और सोची-समझी कर चोरी जैसे मामलों में कार्रवाई की जाती है। CGST अधिनियम की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की स्वीकृति देने का अधिकार प्राप्त है, हालांकि इसके लिए अधिकारी के पास यह विश्वास करने के ठोस आधार होने चाहिए कि संबंधित व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने वर्ष 2022 में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों हेतु मार्गदर्शक सिद्धांत भी जारी किए थे। इनमें स्पष्ट कहा गया था कि केवल इसलिए किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि कानून इसकी इजाजत देता है।
अधिकारों के दुरुपयोग की शिकायतें बनी वजह
इस प्रस्तावित बदलाव के पीछे कर अधिकारियों द्वारा अधिकारों के दुरुपयोग की मिल रही शिकायतों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों के बीच पिछले करीब आठ से नौ महीनों से इस विषय पर विचार-विमर्श जारी है। कारोबारी जगत और कंपनियों की ओर से GST जांच तथा गिरफ्तारी को लेकर लंबे समय से चिंता व्यक्त की जाती रही है।
सरकार अब GST तंत्र में ऐसा संतुलन स्थापित करना चाहती है, जिससे बड़ी धोखाधड़ी पर शिकंजा भी कसा रहे और व्यापारियों को बेवजह भय के माहौल का सामना भी न करना पड़े।
गंभीर धोखाधड़ी पर कार्रवाई जारी रहेगी
प्रस्ताव के अनुसार सोची-समझी गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर किए गए अपराधों पर कार्रवाई का सिलसिला बना रहेगा। अंतर सिर्फ इतना हो सकता है कि GST कानून के तहत कर अधिकारी स्वयं गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग न करें। ऐसे मामलों में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का मार्ग अपनाया जा सकता है, अर्थात जानबूझकर की गई बड़ी धोखाधड़ी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल सबकी निगाहें 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर टिकी हैं। यदि परिषद प्रस्ताव को आगे बढ़ाती है तो GST कानून में संशोधन के उपरांत सरकार इसे शीतकालीन सत्र में संसद के समक्ष रख सकती है। यह ध्यान रहे कि GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति अभी समाप्त नहीं हुई है — यह फिलहाल एक प्रस्ताव है और अंतिम निर्णय काउंसिल की चर्चा व आगामी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।









