देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया है। खासकर राजधानी देहरादून में इस बार आपदा प्रबंधन को लेकर तैयारियां काफी पहले ही शुरू कर दी गई हैं। देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को एक हाई-लेवल बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने साफ लहजे में कह दिया कि आपदा प्रबंधन की तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका असर जमीन पर दिखना चाहिए। मानसून के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दरअसल, पिछले कुछ सालों में मानसून के दौरान देहरादून और आसपास के इलाकों में जलभराव और भूस्खलन की गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने जिले के सभी विभागों को अगले 7 दिनों के भीतर अपनी प्राथमिकताओं और कार्ययोजना से जुड़ा एक विस्तृत ‘माइक्रो प्लान’ सौंपने का अल्टीमेटम दिया है। बैठक में नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD) से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे।
जलभराव और बंद सड़कों से निपटने की युद्धस्तर पर तैयारी
बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम और सभी नगर निकायों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों के नदी-नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई का काम युद्धस्तर पर शुरू करें। अगले 7 दिनों के भीतर सफाई का काम पूरा कर इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को देनी होगी। असल में, हर साल हल्की बारिश में भी शहर के कई हिस्सों में पानी भर जाता है। इस बार डीएम ने जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों में विशेष टास्क फोर्स और कंट्रोल रूम बनाने को कहा है, जो रोज की प्रगति रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजेंगे।
सड़कों और संपर्क मार्गों की बात करें तो जिलाधिकारी ने लोनिवि (PWD), PMGSY, राष्ट्रीय राजमार्ग और NHAI के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जिले के सभी लैंडस्लाइड जोन (भूस्खलन संभावित क्षेत्रों) का दोबारा सत्यापन करें। जो मार्ग मानसून में अक्सर बंद हो जाते हैं, वहां जेसीबी और आवश्यक मशीनरी के साथ-साथ ऑपरेटरों की तैनाती पहले से ही सुनिश्चित कर ली जाए। डीएम ने अधिकारियों से कहा कि अगर मुख्य रास्ता बंद होता है, तो ट्रैफिक को तुरंत डाइवर्ट करने के लिए वैकल्पिक मार्गों की लिस्ट पहले से तैयार रखें ताकि लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही नदी किनारे बसे गांवों की सुरक्षा के लिए एक अलग से एक्शन प्लान बनाने को कहा गया है।
गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और डेंगू-मलेरिया पर फोकस
इस बार के मानसून प्लान में स्वास्थ्य विभाग को बेहद संवेदनशील जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) को निर्देश दिया गया है कि वे दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में रह रही गर्भवती महिलाओं, खासकर ‘हाई रिस्क प्रेग्नेंसी’ वाले मामलों की पहचान करें। मानसून की वजह से रास्ते बंद होने की स्थिति में इन महिलाओं को समय रहते सुरक्षित स्थानों या नजदीकी अस्पतालों में शिफ्ट करने की पूरी प्लानिंग की जाए। इसके साथ ही, मानसून के बाद पनपने वाले डेंगू और मलेरिया जैसे खतरों से निपटने के लिए फीवर क्लीनिक, जांच और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 7 दिनों के भीतर माइक्रो लेवल प्लान मांगा गया है।
बच्चों की पढ़ाई न हो बाधित, शिक्षकों के लिए विशेष निर्देश
मानसून के दौरान पहाड़ों में लैंडस्लाइड और उफनते नदी-नालों की वजह से कई बार बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। इस समस्या का समाधान निकालते हुए डीएम डॉ. आशीष चौहान ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को ऐसे स्कूलों की सूची बनाने का निर्देश दिया है, जहां पहुंचने के लिए छात्रों या शिक्षकों को खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि आपदा की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षक खुद सप्ताह में तय दिनों पर गांवों में जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे।
इसके अलावा बिजली विभाग को ढीले तारों, जर्जर खंभों और ट्रांसफार्मर के पास की पेड़ों की टहनियों को छांटने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश और तूफान के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो। पर्यटन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे पर्यटकों की सुरक्षा के लिए नदी-नालों के पास बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाएं, साथ ही मौसम विभाग के अलर्ट का लगातार प्रचार-प्रसार करें।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में मसूरी के लैंडौर बाजार में हो रहे भू-धंसाव, आवश्यक खाद्य सामग्री और ईंधन के स्टॉक की स्थिति के साथ-साथ सेना और अर्धसैनिक बलों के साथ तालमेल बिठाने जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा की गई। बैठक में अपर जिलाधिकारी के.के मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि कुछ दूरदराज के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।
