देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही प्राकृतिक आपदा और मौसमी बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। इसे देखते हुए देहरादून के जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। राजधानी देहरादून में जलभराव, कूड़े के ढेर और डेंगू-मलेरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि मानसून के इस संवेदनशील समय में किसी भी विभाग की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को दो टूक निर्देश दिया है कि छात्र-छात्राएं पूरी बाजू (फुल स्लीव) के कपड़े पहनकर ही स्कूल आएं। अगर किसी भी स्कूल ने इस नियम की अनदेखी की, तो उसके खिलाफ महामारी अधिनियम (Epidemic Act) के तहत सीधे मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, मानसून के दौरान जलभराव और मच्छरों के पनपने की समस्या आम हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार से संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ एक बेहद अहम वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में उन्होंने आपदा प्रबंधन, स्वच्छता व्यवस्था और डेंगू नियंत्रण की तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की। डीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी विभाग अलर्ट मोड पर आ जाएं और रोजाना अपने-अपने इलाकों की निगरानी करें।
लो-लाइन क्षेत्रों में जीपीएस युक्त जेसीबी तैनात करने के निर्देश
पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के बाद मैदानों में आने वाली बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए प्रशासन ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि नदी के किनारे बसे जितने भी निचले (लो-लाइन) इलाके हैं, वहां पहले से ही जीपीएस से लैस जेसीबी मशीनें तैनात कर दी जाएं। इससे फायदा यह होगा कि आपात स्थिति में बिना वक्त गंवाए तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा। इसके साथ ही, मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को हिदायत दी गई है कि सभी आपदा संचालन केंद्रों (डीओसी) पर एम्बुलेंस और जरूरी दवाइयों का पूरा स्टॉक चौबीसों घंटे तैयार रहे। वन विभाग को भी अलर्ट करते हुए कहा गया है कि वे दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में सूचना तंत्र को मजबूत करें ताकि किसी भी आपदा की खबर तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच सके।
स्कूलों के लिए कड़े नियम, घर-घर जाकर होगा डेंगू लार्वा का सर्वे
देहरादून में डेंगू रोकथाम को लेकर इस बार प्रशासन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। जिलाधिकारी ने नगर निगम और सभी नगर निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे संवेदनशील इलाकों की पहचान करें और वहां युद्ध स्तर पर फॉगिंग व एंटी-लार्वा दावों का छिड़काव कराएं। इसके लिए अगर और अधिक फॉगिंग मशीनें खरीदने की जरूरत है, तो उसे तुरंत खरीदा जाए। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि आशा कार्यकर्ताओं की मदद से घर-घर जाकर सर्वे किया जाए। इस सर्वे के दौरान न सिर्फ छतों और कूलरों में डेंगू के लार्वा की जांच होगी, बल्कि बुखार से पीड़ित मरीजों की पहचान कर उन्हें तुरंत इलाज मुहैया कराया जाएगा।
मुख्य शिक्षा अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है कि वे नगर निकायों के साथ मिलकर हर एक स्कूल का निरीक्षण करें और यह सर्टिफिकेट जारी करें कि स्कूल परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और वहां कहीं भी जलभराव या गंदगी नहीं है।
कूड़े के ढेर दिखने पर नपेंगे अधिकारी
शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर भी डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिले के सभी उप जिलाधिकारियों (एसडीएम) को मैदान में उतरने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अचानक बन गए नए गार्बेज प्वाइंट्स (कूड़े के ढेरों) की पहचान करें और नगर निकाय के साथ मिलकर तुरंत सफाई अभियान चलाएं। जिलाधिकारी ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि अगर किसी भी इलाके में कूड़े का ढेर लगा पाया गया, तो इसके लिए सीधे संबंधित एसडीएम और नगर निकाय के अधिकारी जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में कलेक्ट्रेट सभागार से अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार समेत पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, जिले के सभी उप जिलाधिकारी और नगर निगम व नगर निकायों के अफसर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े रहे।
