अमेरिका में करदाताओं के पैसे से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार विज्ञापन दिखाने का विवादास्पद सिलसिला अब थमने जा रहा है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) ने शनिवार देर रात फेडरल कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा कि Taxpayer ads to end Sunday — यानी सरकारी पैसे से खरीदे गए ये विज्ञापन रविवार के बाद नहीं चलेंगे और “आगे कोई अतिरिक्त मीडिया खरीद की कोई योजना नहीं है।”
लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं होती। डीएचएस सचिव मार्कवेन मुलिन ने रविवार को सीबीएस के “फेस द नेशन” कार्यक्रम में संकेत दिया कि करदाताओं को अब तक खर्च किया गया 20 मिलियन डॉलर वापस नहीं मिलेगा। और इस बीच, इन्हीं विज्ञापनों को लेकर हफ्ते भर में तीसरा मुकदमा दायर हो चुका है — इस बार विस्कॉन्सिन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
Taxpayer ads पर तीन मुकदमे, आरोप एक
पहला मुकदमा 7 अक्टूबर को डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी (डीएनसी) ने वाशिंगटन डीसी की फेडरल कोर्ट में दायर किया। आरोप है कि ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से इस “अवैध गतिविधि” का निर्देश दिया, व्हाइट हाउस ने प्रचार अभियान तैयार किया और बजट प्रबंधन कार्यालय (ओएमबी) ने सीमा सुरक्षा के 20 मिलियन डॉलर इधर-उधर कर दिए। डीएनसी ने 9 अक्टूबर को अस्थायी रोक (टेम्परेरी रिस्ट्रेनिंग ऑर्डर) की भी मांग की।
दूसरा मुकदमा कॉमन कॉज़, एक न्यूयॉर्क पब्लिक कर्मचारी यूनियन और अलबामा के एक डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की ओर से डेमोक्रेसी फॉरवर्ड ने दायर किया। और अब तीसरा — विस्कॉन्सिन डेमोक्रेटिक पार्टी। तीनों मुकदमों का कहना है कि ये विज्ञापन कांग्रेस द्वारा तय “प्रचार या दुष्प्रचार” (पब्लिसिटी और प्रोपेगैंडा) पर प्रतिबंध का उल्लंघन हैं। शिकायत के मुताबिक, ओएमबी ने कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के “स्मृति कार्यक्रम” बजट से 20 मिलियन डॉलर बढ़ा दिए — वही बजट जो सीमा पर शहीद हुए अधिकारियों के स्मारकों और सम्मान समारोहों के लिए था।
क्या दिखाया गया इन विज्ञापनों में
रिपोर्टों के मुताबिक, 30 सेकंड के ये स्पॉट एनएफएल मैचों, कॉलेज फुटबॉल और रविवार सुबह के न्यूज़ शोज़ के दौरान चले। एक विज्ञापन तो लगभग ट्रंप के 2024 अभियान वाले विज्ञापन की ही प्रति है — बस अभियान के डिस्क्लेमर की जगह “अमेरिकी सरकार द्वारा भुगतान” लिख दिया गया। माउंट रशमोर जैसे दृश्यों के बीच ट्रंप समाजवाद-साम्यवाद को हराने की चेतावनी देते दिखे। शिकायत के मुताबिक, बुधवार सुबह तक ये विज्ञापन करीब 14,000 बार प्रसारित हो चुके थे, 1.39 अरब इम्प्रेशन बने और करदाताओं को करीब 12.6 मिलियन डॉलर का खर्च आया।
व्हाइट हाउस ने इन्हें “जनसेवा घोषणाएं” बताया है — “शैक्षणिक और बेबाक देशभक्तिपूर्ण”। लेकिन रॉयटर्स/इप्सॉस के सर्वे में करीब 86 फीसदी अमेरिकियों ने चुनाव से पहले राष्ट्रपति वाले विज्ञापनों पर करदाता धन खर्च को अनुचित बताया। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस तक ने कहा कि यह उचित पीएसए नहीं है। ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि आगे से उनका सुपर पीएसी मैगा इंक खर्च उठाएगा, पर पहले खर्च हो चुका पैसा वापस नहीं होगा।
दिलचस्प बात यह है कि डीएचएस ने कोर्ट में विज्ञापनों की वैधता पर सीधे कुछ नहीं कहा — बस यह दलील दी कि याचिकाकर्ताओं को नुकसान नहीं हुआ, इसलिए रोक की जरूरत नहीं। वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ट्रंप के “ऐसा दिखाओ कि मैं मतपत्र पर हूं” वाले बयान खुद बताते हैं कि ये विज्ञापन चुनाव से जुड़े हैं। नवंबर के मध्यावधि चुनावों से हफ्तों पहले यह कानूनी लड़ाई अब अमेरिकी लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा बन गई है।















