इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग का धुआं दक्षिण-पूर्व एशिया पर छा गया है। Singapore haze F1 Grand Prix के आयोजन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि सिंगापुर का प्रदूषण मानक सूचकांक (पीएसआई) 170 तक पहुंच गया है- यह इस साल का सबसे ऊंचा स्तर है। 101 से ऊपर का स्तर ‘अस्वास्थ्यकर’ और 200 से ऊपर ‘बेहद अस्वास्थ्यकर’ माना जाता है। सोमवार सुबह की कुछ रिपोर्टों में शुरुआती रीडिंग 222 तक बताई गई, यानी बेहद खतरनाक श्रेणी में।
बुधवार को स्विस फर्म आईक्यूएयर ने सिंगापुर की हवा को दुनिया में सबसे खराब बताया- ‘बेहद अस्वास्थ्यकर’ श्रेणी में। शहर में लोग मास्क पहनकर निकल रहे हैं और दृश्यता घट गई है। कम दृश्यता की वजह से लोगों को बाहर निकलने में दिक्कत हो रही है और ज्यादातर लोग मास्क पहनकर ही घर से बाहर कदम रख रहे हैं। मलेशिया, सिंगापुर और फिलीपींस धुंध की चपेट में हैं। इंडोनेशिया में मुख्य रूप से अवैध स्लैश-एंड-बर्न भूमि सफाई से लगी आग सूखे और अल नीनो के कारण और भड़की है।
Singapore haze F1 Grand Prix: आयोजकों का बयान- आपात योजना तैयार
इस हफ्ते के आखिर में होने वाले सिंगापुर फॉर्मूला 1 ग्रां प्री पर भी इस धुंध का साया है। आयोजकों ने कहा है कि अभी किसी बदलाव की योजना नहीं है, लेकिन आपात उपाय तैयार रखे गए हैं- लागत मूल्य पर मास्क उपलब्ध कराए जाएंगे और चिकित्सा चौकियां सतर्क रहेंगी। आयोजकों का कहना है, ‘अगर धुंध से दृश्यता, सार्वजनिक स्वास्थ्य या संचालन में कोई दिक्कत आई तो सिंगापुर जीपी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा।’ आयोजकों ने भरोसा जताया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जाएंगे। क्षेत्र में कई उड़ानें डायवर्ट या रद्द हुई हैं, हालांकि चांगी एयरपोर्ट ने संचालन जारी रहने का भरोसा जताया है।
मलेशिया में 200 स्कूल बंद, आसियान की आपात बैठक
मलेशिया ने जोहोर के बातू पाहट में करीब 200 स्कूल बंद कर दिए हैं और बंदी को जोहोर, मलक्का, नेगेरी सेम्बिलन व सेलांगोर तक बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने इस संकट पर आसियान की क्षेत्रीय बैठक बुलाई है। दरअसल हर साल लगने वाली यह आग इस बार सूखे की वजह से बेकाबू हो गई है और इसका धुआं सैकड़ों किलोमीटर दूर तक फैल गया है।
स्वास्थ्य संकट: तीन महीने में 1.75 लाख सांस की बीमारियां
जुलाई से सितंबर के बीच इंडोनेशिया में आग से जुड़ी करीब 1,75,000 सांस संबंधी बीमारियां दर्ज की गईं। ग्रीनपीस ने 20 से ज्यादा कंपनियों की पहचान की है- जिनमें पाम तेल, लुगदी और चीनी से जुड़ी कंपनियां हैं- जिनके रियायती इलाके धुएं के स्रोत हैं। यह संकट 2015 की भयानक धुंध की याद दिला रहा है, जब पूरा क्षेत्र हफ्तों तक धुएं में डूबा रहा था।
फिलहाल बारिश ही इस संकट का असली समाधान मानी जा रही है। जब तक आग पर काबू नहीं पाया जाता, सिंगापुर से लेकर कुआलालंपुर तक लोगों को मास्क और घर के अंदर रहने की सलाह के साथ जीना होगा। और रेस प्रशंसकों की नजरें अब आसमान पर टिकी हैं- क्या धुंध ग्रां प्री का मजा किरकिरा करेगी?















