पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न भरना किसी परीक्षा जैसा लगता है — फॉर्म, धाराएं, डेडलाइन… और इसी घबराहट में लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो बाद में नोटिस या परेशानी का कारण बनती हैं। अगर आप इस साल पहली बार ITR Filing कर रहे हैं, तो ITR filing mistakes यानी इन आम गलतियों को पहले से जान लेना आपके बहुत काम आएगा।
असल में ज्यादातर गलतियां जानकारी की कमी से होती हैं, बेईमानी से नहीं। लेकिन टैक्स विभाग के लिए गलती गलती होती है — इरादा चाहे जो भी हो। इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
ITR Filing Mistakes: गलत फॉर्म चुनना सबसे बड़ी भूल
आयकर विभाग ने अलग-अलग तरह की आय के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म बनाए हैं। नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए अलग फॉर्म है, कारोबारियों के लिए अलग और पूंजीगत लाभ वालों के लिए अलग। गलत फॉर्म में रिटर्न भरना सबसे आम गलती है, और इससे रिटर्न खारिज भी हो सकता है। फॉर्म चुनने से पहले अपनी आय के सभी स्रोतों की सूची बना लें।
गौरतलब है कि कई लोग पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच फैसला भी जल्दबाजी में ले लेते हैं। दोनों व्यवस्थाओं की तुलना अपनी आय, खर्च और निवेश के हिसाब से करें। जो व्यवस्था आपके लिए फायदेमंद हो, वही चुनें — दूसरों की देखा-देखी में फैसला न लें।
छोटी-छोटी आय छिपाना पड़ सकता है भारी
बचत खाते का ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज, फ्रीलांसिंग से मिली छोटी रकम — लोग अक्सर इन्हें रिटर्न में दिखाना भूल जाते हैं या जानबूझकर छोड़ देते हैं। दरअसल, आज के डिजिटल दौर में आपकी लगभग हर वित्तीय लेनदेन की जानकारी विभाग के पास पहले से होती है। छोटी आय छिपाने पर बाद में नोटिस और अतिरिक्त देनदारी दोनों झेलने पड़ सकते हैं।
फॉर्म 16 में दिख रही आय और आपके बैंक खातों में आई रकम का मिलान जरूर करें। अगर दोनों में अंतर है तो कारण समझकर रिटर्न में सही जानकारी दें। ईमानदारी से भरा गया रिटर्न ही मानसिक शांति देता है।
कई पहली बार रिटर्न भरने वाले यह भी नहीं जानते कि किस आय पर कितना टैक्स बनेगा। दरअसल, आपको खुद टैक्स की गणना करने की जरूरत नहीं है — ऑनलाइन पोर्टल आपकी दी गई जानकारी के आधार पर गणना कर देता है। आपका काम सिर्फ सही और पूरी जानकारी देना है। अनुमान या अंदाजे से आंकड़े कभी न भरें।
वेरिफिकेशन न भूलें — वरना रिटर्न रहेगा अधूरा
बहरहाल, सबसे हैरान करने वाली गलती है रिटर्न भरकर उसे वेरिफाई न करना। रिटर्न तभी पूरा माना जाता है जब उसका वेरिफिकेशन हो जाए — आधार ओटीपी जैसे तरीकों से यह काम मिनटों में हो जाता है। बिना वेरिफिकेशन के रिटर्न दाखिल ही नहीं माना जाता, और समय सीमा निकल जाने पर परेशानी भी हो सकती है।
पहली बार रिटर्न भर रहे हैं तो किसी अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लेने में कोई हर्ज नहीं। सही शुरुआत ही आने वाले वर्षों में आपके टैक्स प्रबंधन को आसान बनाती है।
एक और आम चूक है बैंक खातों की जानकारी न देना। रिटर्न में अपने सभी सक्रिय बैंक खातों का विवरण देना जरूरी होता है, ताकि रिफंड सही खाते में आ सके। वही खाता चुनें जो सक्रिय हो और जिसमें आप रिफंड पाना चाहते हों — बंद या निष्क्रिय खाता चुनने पर रिफंड अटक सकता है।















