गाजा में युद्धविराम को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन जिस शांति योजना की घोषणा धूमधाम से हुई थी, वह अब अटकी पड़ी है। एक साल पहले इजरायल और हमास के बीच हुए समझौते के तहत इजरायली सेना को गाजा के कुछ हिस्सों से हटना था और मानवीय सहायता बढ़नी थी। लेकिन आज की तस्वीर बिल्कुल उलट है — इजरायल का नियंत्रण बढ़ा है, सहायता नाकाफी है और Gaza ceasefire one year बाद भी मौतों का सिलसिला थमा नहीं है।
ट्रंप की योजना के शुरुआती चरण में इजरायल को “येलो लाइन” तक पीछे हटना था, जिससे उसकी सेना गाजा के 53% हिस्से पर नियंत्रण रखती। लेकिन तब से इजरायली सेना ने अपना प्रभावी नियंत्रण बढ़ाकर लगभग दो-तिहाई क्षेत्र तक कर लिया है। आगे बढ़ती येलो लाइन ने और ज्यादा फिलिस्तीनियों को विस्थापित किया है, जिससे 20 लाख की आबादी सिकुड़ती तटीय पट्टी में तंबुओं और क्षतिग्रस्त इमारतों में रहने को मजबूर है।
Gaza ceasefire one year: सहायता आधी, भूख बरकरार
दरअसल, सहायता के मोर्चे पर भी हालात चिंताजनक हैं। वैश्विक भूख निगरानी संस्था IPC के मुताबिक, सहायता अभियानों में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी के बावजूद 12 लाख से ज्यादा लोग अब भी गंभीर भूख का सामना कर रहे हैं। अगस्त की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम से मई के अंत तक गाजा में रोजाना औसतन 227 ट्रक मानवीय और वाणिज्यिक आपूर्ति लेकर पहुंचे — यह गाजा योजना में तय न्यूनतम 600 ट्रकों के आधे से भी कम है।
इजरायल का दावा है कि रोजाना करीब 600 ट्रक सहायता और सामान लेकर प्रवेश कर रहे हैं और गाजा को जरूरत का सामान मिल रहा है। लेकिन सहायता एजेंसियों का कहना है कि इजरायल जरूरी चीजों — जैसे धातु के तंबू के खंभे, इंजन ऑयल और पुर्जे — को यह कहकर रोक रहा है कि हमास इन्हें सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
निरस्त्रीकरण पर अटका दूसरा चरण
असल में शांति योजना का दूसरा चरण हमास के निरस्त्रीकरण पर टिका था, और वही सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। ट्रंप ने कहा था कि हमास और अन्य गाजा उग्रवादी शांति बोर्ड द्वारा तैयार 15-सूत्री रोडमैप को स्वीकार कर चुके हैं, जिसके तहत वे हथियार छोड़ देंगे। हमास ने कहा था कि वह अपने हथियार अमेरिका समर्थित फिलिस्तीनी तकनीकी सरकार के नियंत्रण में सौंपने को तैयार है — हालांकि उसने “निरस्त्रीकरण” शब्द को खारिज कर दिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक दोनों पक्ष पहले चरण की शर्तों पर पूरी तरह अमल नहीं करते, दूसरे चरण की बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। मानवीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि सर्दियों के नजदीक आने के साथ गाजा में हालात और बिगड़ सकते हैं।
लेकिन जनवरी 2026 में दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा के बाद से बातचीत ठप है। इजरायल का कहना है कि जब तक निरस्त्रीकरण में प्रगति नहीं दिखेगी, वह आगे नहीं बढ़ेगा। वहीं हमास का कहना है कि जब तक इजरायल पहले चरण को पूरी तरह लागू नहीं करता, वह दूसरे चरण पर चर्चा नहीं करेगा। बताया जा रहा है कि युद्धविराम के बाद से 1,145 फिलिस्तीनी और 7 इजरायली सैनिक मारे जा चुके हैं। बहरहाल, एक साल बाद यह साफ है कि कागज पर बनी योजना और जमीनी हकीकत के बीच की खाई अभी भी बहुत गहरी है।















