मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी सेना ने करीब 9,000 सैनिकों को जहाजों के एक समूह के साथ मध्य-पूर्व की ओर रवाना कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ नए हमले हो सकते हैं। (US Iran strikes 2026)
दरअसल, इस तैनाती के साथ अमेरिका की नौसैनिक मौजूदगी असामान्य रूप से बढ़ जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, अक्टूबर के अंत तक इस क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोत एक साथ तैनात हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि पेंटागन ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड को ईरान में बड़े सैन्य अभियान फिर से शुरू करने की तैयारियां पूरी करने का आदेश दिया है, हालांकि ट्रंप ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
कौन-कौन से जहाज रवाना हुए
रवाना हुए समूह में यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप शामिल है, जिसके साथ क्रूजर यूएसएस चोसिन भी है। इसके अलावा यूएसएस माकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडिनेस ग्रुप भी है, जिसमें यूएसएस जॉन पी. मर्था और यूएसएस एंकरेज जैसे लैंडिंग जहाज शामिल हैं। इन जहाजों पर 7,000 से ज्यादा नाविक और 2,000 मरीन सवार हैं।
गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पहले से ही यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश और यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन तैनात हैं। नई तैनाती के बाद मध्य-पूर्व में 20,000 से ज्यादा अमेरिकी नाविक और मरीन तथा सैकड़ों विमान मौजूद होंगे। नौसेना ने इससे पहले अप्रैल में 2003 के बाद पहली बार एक साथ तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किए थे।
US Iran Strikes 2026: ट्रंप का रुख — समझौते का रास्ता लगभग बंद समझौते का रास्ता लगभग बंद
ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह ईरान के साथ अब कोई समझौता नहीं चाहते। उनके शब्दों में, उन्हें नहीं लगता कि समझौता वाकई कुछ ऐसा है जो वह करना चाहते हैं, लेकिन ईरान इसे रोकने के लिए कुछ भी देने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब खबरें हैं कि पेंटागन ईरान के खिलाफ संभावित हमलों के विकल्प तैयार कर रहा है।
एक अन्य घटनाक्रम में ट्रंप ने इज़राइल जाने वाली एक उड़ान में सह-पायलट द्वारा कप्तान पर चाकू से हमला करने की घटना का ईरान से संबंध होने के शुरुआती संकेतों का दावा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह संबंध साबित हुआ तो ईरान को बहुत जोर से मारा जाएगा। हालांकि उन्होंने इस दावे का कोई सबूत पेश नहीं किया।
मध्यावधि चुनाव से पहले कार्रवाई की अटकलें
कई रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम आने वाले हफ्तों में ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर विचार कर रही है — जिसमें 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले हमले का विकल्प भी शामिल है। बताया जा रहा है कि अगर अभियान फिर शुरू हुआ तो यह अमेरिका-इज़राइल का संयुक्त अभियान हो सकता है, जिसमें ईरान के ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों पर बड़ी बमबारी की संभावना है।
बहरहाल, व्हाइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति के पास हर समय सभी विकल्प खुले हैं। फरवरी में शुरू हुए हमलों के बाद से ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई है, और डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में वापसी की उम्मीद है — ऐसे में ईरान पर फैसला अमेरिकी राजनीति के लिए भी अहम हो गया है।













