क्रेडिट कार्ड का बकाया, पर्सनल लोन की EMI, किसी रिश्तेदार से लिया उधार — जब कई कर्ज एक साथ चलने लगते हैं तो महीने की शुरुआत ही टेंशन के साथ होती है। सैलरी आते ही EMI में चली जाती है और घर चलाना मुश्किल हो जाता है। धीरे-धीरे एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेने की नौबत आ जाती है। इसी स्थिति को कर्ज का जाल (debt trap) कहा जाता है, और अच्छी खबर यह है कि इससे बाहर निकलना नामुमकिन नहीं है।
दरअसल, कर्ज के जाल में फंसने की सबसे बड़ी वजह कर्ज लेना नहीं, बल्कि बिना योजना के कर्ज लेना है। आसान किस्तों और तुरंत अप्रूवल के चक्कर में लोग अपनी चुकाने की क्षमता से ज्यादा बोझ उठा लेते हैं। लेकिन सही रणनीति और अनुशासन से इस स्थिति को पलटा जा सकता है। जरूरत है सिर्फ ईमानदार शुरुआत की।
Debt Trap से निकलने के लिए पहले पूरी तस्वीर साफ करें
सबसे पहला कदम है अपने सारे कर्जों की सूची बनाना। हर कर्ज के सामने लिखें — कितना बकाया है, ब्याज दर क्या है, हर महीने कितनी EMI जाती है और कब तक चलेगा। यह सूची बनाते समय खुद से ईमानदार रहें, कोई भी छोटा-बड़ा कर्ज छिपाएं नहीं।
बताया जा रहा है कि वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, जब तक आपको यह नहीं पता कि कुल कितना कर्ज है, तब तक उससे लड़ने की योजना नहीं बन सकती। यह सूची ही आपका रोडमैप बनेगी। कई बार सिर्फ इसे लिख लेने से ही आधी घबराहट कम हो जाती है, क्योंकि समस्या अब धुंधली नहीं, साफ नजर आती है।
सबसे महंगे कर्ज को पहले निपटाएं
सूची बनने के बाद सबसे ज्यादा ब्याज दर वाले कर्ज को प्राथमिकता दें। आमतौर पर क्रेडिट कार्ड का बकाया सबसे महंगा होता है, क्योंकि इस पर ब्याज दर बहुत ज्यादा होती है और सिर्फ न्यूनतम रकम चुकाने से कर्ज खत्म होने का नाम नहीं लेता। ऐसे कर्ज को जल्द से जल्द निपटाना समझदारी है।
एक कर्ज खत्म होते ही उसकी EMI की रकम को अगले कर्ज के भुगतान में जोड़ दें। इससे बिना अतिरिक्त बोझ के कर्ज तेजी से खत्म होते हैं। इस दौरान नया कर्ज लेने से सख्त परहेज करें — नया क्रेडिट कार्ड या टॉप-अप लोन जाल को और गहरा करता है।
अगर दो कर्जों पर ब्याज दर लगभग एक जैसी है, तो पहले छोटे बकाये वाले कर्ज को निपटाएं। एक कर्ज पूरी तरह खत्म होने से मनोबल बढ़ता है और आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है। छोटी-छोटी जीतें ही बड़ी लड़ाई जीतने का हौसला देती हैं।
खर्च की आदतें बदलना भी जरूरी
असल में कर्ज से बाहर निकलना सिर्फ गणित का खेल नहीं, आदतों का भी है। कुछ महीनों के लिए गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाएं। बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग और दिखावे के खर्च — इनमें कटौती से हर महीने अच्छी-खासी रकम बच सकती है, जो कर्ज चुकाने में काम आएगी।
अगर स्थिति बहुत गंभीर हो तो बैंक से बात करने में झिझकें नहीं। कई बार बैंक EMI की अवधि बढ़ाकर या शर्तों में राहत देकर मदद करते हैं। और सबसे जरूरी — घबराएं नहीं। कर्ज का जाल धैर्य, योजना और अनुशासन से ही कटता है। एक-एक करके कर्ज खत्म होंगे और एक दिन सैलरी पूरी आपकी होगी।















