हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाना चाहते हैं, लेकिन सेविंग अकाउंट में पैसा पड़ा रहता है और खर्च हो जाता है? ऐसे में रिकरिंग डिपॉजिट यानी RD एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह उन लोगों के लिए बनाया गया है जो नियमित रूप से छोटी रकम बचाकर अच्छा फंड तैयार करना चाहते हैं।
RD काम कैसे करता है
RD में आप हर महीने एक तय रकम बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करते हैं। अवधि 6 महीने से लेकर 10 साल तक हो सकती है, और हर महीने की किस्त एक ही तारीख को जमा करनी होती है। मैच्योरिटी पर आपको जमा की गई कुल रकम के साथ ब्याज भी मिलता है।
RD पर मिलने वाला ब्याज आमतौर पर सेविंग अकाउंट से ज्यादा होता है और फिक्स्ड डिपॉजिट के करीब होता है। ब्याज तिमाही आधार पर जुड़ता है, जिससे चक्रवृद्धि का फायदा मिलता है। यानी आपका पैसा धीरे-धीरे अपने आप बढ़ता रहता है।
किन लोगों के लिए है फायदेमंद
RD सबसे ज्यादा उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनकी आमदनी नियमित है, जैसे नौकरीपेशा लोग। हर महीने सैलरी आते ही RD की किस्त कट जाती है, तो बचत अपने आप हो जाती है। छात्रों और पहली बार बचत शुरू करने वालों के लिए भी यह अच्छा है, क्योंकि 500 या 1000 रुपये जैसी छोटी रकम से भी RD शुरू की जा सकती है।
अगर आपका कोई तय लक्ष्य है — जैसे एक साल बाद फोन खरीदना, शादी का खर्च या बच्चों की फीस — तो उस लक्ष्य के हिसाब से RD की अवधि चुनना समझदारी होती है। लक्ष्य पूरा होते ही मैच्योरिटी का पैसा काम आ जाता है।
RD खोलते समय इन बातों का रखें ध्यान
RD खोलने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना कर लें, क्योंकि दरों में थोड़ा अंतर होता है। समय से पहले RD तोड़ने पर जुर्माना लगता है और ब्याज भी कम मिलता है, इसलिए ऐसी अवधि चुनें जिसे आप पूरा कर सकें।
एक बात और जान लें — RD पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स के नियम लागू होते हैं। अगर एक साल में ब्याज एक तय सीमा से ज्यादा होता है तो बैंक टीडीएस काट सकता है। इसलिए RD को अपनी कुल टैक्स प्लानिंग का हिस्सा मानकर चलें। सही अवधि, सही रकम और नियमित किस्त — बस इन्हीं तीन बातों से RD आपकी बचत की मजबूत आदत बना सकता है।









