नौकरी के इंटरव्यू में जब सैलरी की बात आती है, तो ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं और जो मिल रहा है उसी पर हां कह देते हैं। लेकिन सही तरीके से बातचीत करने पर आपकी शुरुआती सैलरी या इंक्रीमेंट काफी बेहतर हो सकता है। सैलरी नेगोशिएशन कोई लड़ाई नहीं, बल्कि एक पेशेवर बातचीत है।
बातचीत से पहले करें होमवर्क
नेगोशिएशन की सबसे बड़ी ताकत है जानकारी। अपने रोल, अनुभव और शहर के हिसाब से मार्केट में कितनी सैलरी मिल रही है, यह पहले से पता कर लें। दोस्तों, सीनियर्स या भरोसेमंद ऑनलाइन सैलरी प्लेटफॉर्म से अंदाजा लगाया जा सकता है। अपने काम के नतीजे भी तैयार रखें — आपने पिछले काम में क्या हासिल किया, इसकी सूची बनाएं।
साथ ही अपनी न्यूनतम स्वीकार्य सैलरी पहले से तय कर लें। इससे बातचीत के दौरान आप जल्दबाजी में कोई गलत फैसला नहीं लेंगे। यह भी सोच लें कि सैलरी के अलावा आपके लिए क्या मायने रखता है — वर्क फ्रॉम होम, छुट्टियां, सीखने के मौके या बोनस।
सही समय और सही अंदाज चुनें
सैलरी की बात तब करें जब कंपनी आपकी तरफ झुकी हुई हो, यानी जब वे आपको चुनने के मूड में हों। इंटरव्यू की शुरुआत में ही सैलरी का मुद्दा उठाना ठीक नहीं रहता। जब आपसे पूछा जाए कि आपकी अपेक्षा क्या है, तो एक रेंज बताएं, कोई एक फिक्स नंबर नहीं। रेंज के निचले हिस्से में आपकी न्यूनतम स्वीकार्य राशि होनी चाहिए।
बातचीत हमेशा शांत और सम्मानजनक अंदाज में करें। अपनी मांग के पीछे तर्क दें — आपका अनुभव, आपके स्किल्स और मार्केट रेट। धमकी या दबाव वाले अंदाज से बचें। अगर कंपनी बजट की बात कहे, तो सैलरी के अलावा दूसरे फायदों पर बात करें, जैसे जॉइनिंग बोनस, सालाना रिव्यू या अतिरिक्त छुट्टियां।
ना सुनें तो भी घबराएं नहीं
कभी-कभी कंपनी आपकी मांग पूरी नहीं कर पाती। ऐसे में निराश होने के बजाय पूछें कि भविष्य में सैलरी बढ़ने की क्या संभावना है और परफॉर्मेंस रिव्यू कब होगा। कई कंपनियां 6 महीने बाद रिव्यू का वादा करती हैं — इसे लिखित में जरूर लें।
अगर ऑफर आपकी न्यूनतम सीमा से काफी नीचे है, तो विनम्रता से मना करना भी एक विकल्प है। गलत सैलरी पर जॉइन करके बाद में पछताने से बेहतर है सही मौके का इंतजार करना। याद रखें, नेगोशिएशन एक स्किल है जो अभ्यास से बेहतर होती है — हर बातचीत से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।









