विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहे जाने वाले अमेरिका पर कर्ज का पहाड़ रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। अमेरिकी सरकार का कुल कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो चुका है और हैरानी की बात यह है कि यह कर्ज उस दौर में बढ़ रहा है, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि महंगाई का एक विशेष स्तर देश के इस विशाल कर्ज को तेजी से चुकाने में सहायक हो सकता है।
ट्रंप ने इंटरव्यू में क्या कहा
ट्रंप ने हाल में एक साक्षात्कार में कहा कि कर्ज उतारने के कई तरीके हैं, लेकिन एक तरीका विकास के माध्यम से इसे चुकाना है — और ऐसा विकास हमने पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने बताया कि भले ही पहले कम ब्याज दरों के कारण उधार लेना सस्ता था, लेकिन मौजूदा दौर की ऊंची ब्याज दरों के बीच सरकार कर्ज के बोझ से निपटने के लिए अन्य तरीकों का सहारा ले सकती है। माना जा रहा है कि उनका संकेत महंगाई के उस स्तर की ओर है, जिससे सरकार की आय बढ़े और कर्ज का वास्तविक बोझ घटे।
रोजाना ब्याज पर 3.8 अरब डॉलर खर्च
अमेरिका के कर्ज के आंकड़े सचमुच चौंकाने वाले हैं। अमेरिकी सरकार हर दिन कर्ज का ब्याज चुकाने पर 3.8 अरब डॉलर खर्च कर रही है। अनुमान है कि 2028 तक यह राशि रोजाना करीब 5 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी, जो किसी भी अन्य सरकारी खर्च से अधिक होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, कर्ज के ब्याज का भुगतान यानी नेट इंटरेस्ट सरकारी आय के प्रतिशत के रूप में लगभग तीन गुना बढ़कर रिकॉर्ड 19.7 प्रतिशत पर पहुंच गया है। संघीय सरकार की कुल आय का 98.4 प्रतिशत हिस्सा नेट इंटरेस्ट, सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर, हेल्थकेयर और पूर्व सैनिकों के लाभों में खर्च हो रहा है।
सरकार के पास सिर्फ तीन विकल्प
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार के पास इससे निपटने के केवल तीन रास्ते हैं — कर बढ़ाना, खर्च घटाना या और उधार लेना। ज्यादातर मामलों में सरकारों ने उधार लेना ही चुना है और यही कारण है कि कर्ज लगातार बढ़ता गया। ट्रेजरी विभाग के अनुमान अनुसार, अमेरिका का डेट-टू-जीडीपी अनुपात 2050 तक 213 प्रतिशत से ऊपर जा सकता है, यानी कर्ज जीडीपी के दोगुने से भी ज्यादा होगा।
महंगाई का गणित कितना सही
माना जाता है कि जब महंगाई बढ़ती है तो नाममात्र आय और कर संग्रह भी बढ़ता है, जिससे पुराने कर्ज का सापेक्ष बोझ कम होता है। हालांकि अर्थशास्त्री चेतावनी देते हैं कि जानबूझकर महंगाई बढ़ाने का प्रयास आम लोगों की जेब पर सीधी चोट करेगा और ब्याज दरें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे नया उधार और महंगा हो जाएगा। ट्रंप के इस बयान पर दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों के बीच बहस छिड़ गई है।









