बंगाल की खाड़ी में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि 13 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। इस Bay of Bengal Low Pressure के असर से ओडिशा समेत पूर्वी भारत के कई राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर शुरू होने की आशंका है। मौसम विभाग ने ओडिशा के 14 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी कर दिया है।
दरअसल, मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के ऊपर ऊपरी हवा में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जो समुद्र तल से करीब 9.4 किलोमीटर ऊंचाई तक फैला है। अगले 24 घंटों में इसके अंडमान सागर की ओर बढ़ने की संभावना है, और उसी के प्रभाव से 13 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर क्षेत्र विकसित हो सकता है। हालांकि, मौसम विभाग ने अभी यह साफ नहीं किया है कि यह सिस्टम आगे और कितना मजबूत होगा या किस दिशा में बढ़ेगा।
Bay of Bengal Low Pressure: ओडिशा के 14 जिलों में येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए ओडिशा के 14 जिलों में येलो वार्निंग जारी की है। इन जिलों में गजपति, गंजम, नयागढ़, ढेंकनाल, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, कटक, खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर, बालासोर, क्योंझर और मयूरभंज शामिल हैं। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बिजली कड़कने, हल्की से मध्यम बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
तटीय और आंतरिक दोनों जिलों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कई जगहों पर हल्की से मध्यम बौछारें पड़ेंगी, तो कुछ जगहों पर भारी बारिश भी संभव है। पिछले 24 घंटों में पुरी में सबसे ज्यादा 79.4 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि पारलाखेमुंडी में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री रहा। बिजली कड़कने के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
बिहार, यूपी, झारखंड समेत इन राज्यों में भी अलर्ट
बताया जा रहा है कि इस सिस्टम का असर सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं रहेगा। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बारिश और गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। अक्टूबर का महीना वैसे भी बंगाल की खाड़ी में मौसम प्रणालियों के लिहाज से सक्रिय रहता है, और यही वजह है कि मौसम विभाग हर अपडेट पर बारीकी से नजर रख रहा है।
12 अक्टूबर से बारिश की गतिविधि में कमी आने की उम्मीद है और उस दिन के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं है। अगले सात दिनों में तापमान में खास बदलाव की संभावना नहीं है। किसानों को मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
‘साइक्लोन अर्नब’ की सच्चाई क्या है? जानिए पूरा मामला
गौरतलब है कि सितंबर के आखिरी हफ्ते में बंगाल की खाड़ी के एक सिस्टम को लेकर सोशल मीडिया पर ‘साइक्लोन अर्नब’ का नाम खूब चर्चा में रहा था। हकीकत यह है कि IMD ने उस सिस्टम को कभी चक्रवाती तूफान की श्रेणी में नहीं रखा। वह सिस्टम गहरे अवदाब (deep depression) के रूप में 23-24 सितंबर की रात को कलिंगपट्नम के पास तट से टकराया था, जहां हवाओं की रफ्तार 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक थी।
‘अर्नब’ नाम बांग्लादेश की ओर से क्षेत्रीय चक्रवात नामकरण सूची में दिया गया था, जिसका बांग्ला में अर्थ ‘समुद्र’ होता है। यह सूची में अगला उपलब्ध नाम था, लेकिन चूंकि सिस्टम चक्रवाती तूफान की ताकत (लगभग 63 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा हवाएं) तक कभी पहुंचा ही नहीं, इसलिए यह नाम आधिकारिक रूप से कभी सक्रिय नहीं हुआ। यानी ‘साइक्लोन अर्नब’ नाम का कोई आधिकारिक तूफान अस्तित्व में आया ही नहीं। नए 13 अक्टूबर वाले सिस्टम को लेकर भी IMD ने अभी चक्रवात बनने का कोई पूर्वानुमान नहीं दिया है।
फिलहाल मौसम विभाग सिस्टम के विकसित होने के साथ आगे के अपडेट जारी करेगा। तटीय इलाकों के लोगों और मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे विभाग के ताजा बुलेटिन पर नजर रखें और अनावश्यक जोखिम न लें।















