नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट से उपजे वैश्विक आर्थिक तूफान के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से टिकी हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत के आर्थिक बुनियादी तत्व न सिर्फ बरकरार हैं, बल्कि और मजबूत हुए हैं।
राजधानी में आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (केईसी 2026) के विशेष पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी, अगस्त 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई करीब 4.8 प्रतिशत रही और चालू खाता घाटा जीडीपी का मात्र 0.5 प्रतिशत रहा।
वैश्विक कर्ज 100 प्रतिशत के पार जाने का अनुमान
सीतारमण ने आगाह किया कि 2025 में वैश्विक सार्वजनिक ऋण जीडीपी के करीब 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है और 2029 तक इसके 100 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार देखा गया स्तर होगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक झटकों को सहने के लिए दुनिया के पास अब पहले से भी कम गुंजाइश बची है।
वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक लचक के चार आधार बताए — जनधन-आधार-मोबाइल और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से घरेलू स्तर पर मजबूती, मुद्रा ऋण और बैंकिंग सुधारों से उत्पादक भागीदारी, राजमार्ग-रेलवे-बंदरगाहों से भौतिक बुनियादी ढांचा और जीएसटी, दिवाला संहिता व श्रम संहिताओं जैसे सुधारों से सुशासन। उन्होंने बताया कि पीएम मुद्रा योजना के तहत अब तक 52 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय रखा गया है।
आरबीआई गवर्नर बोले- सतर्कता जरूरी
वहीं भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय वित्तीय प्रणाली लचीली बनी हुई है और अर्थव्यवस्था ने पश्चिम एशिया संकट का सामना अच्छी तरह किया है, लेकिन नीति निर्माताओं को सतर्क रहना होगा। उन्होंने कृत्रिम मेधा से जुड़े बढ़े हुए मूल्यांकन, वैश्विक ऋण के ऊंचे स्तर, निजी ऋण और साइबर जोखिमों को लेकर आगाह किया।
मल्होत्रा ने कहा कि आयात स्रोतों में विविधता, ऊर्जा में आत्मनिर्भरता, मुक्त व्यापार समझौते और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान जैसे कदमों से लचक और बढ़ाई जा रही है।
ईंधन और वित्तीय झटके पहले से असरदार
विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्र ने कहा कि ईंधन की ऊंची कीमतें और कड़ी वित्तीय परिस्थितियां पहले से ही वैश्विक मांग पर असर डाल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमान के मुताबिक 2026 में वैश्विक तेल मांग में प्रतिदिन 25 लाख बैरल की गिरावट आ सकती है। भारत अपनी खपत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए ईंधन का झटका उसके लिए अहम है।
उधर 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत को किसी बड़े खाद्य संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा और अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर कुछ समय तक कम से कम 7 प्रतिशत बनी रह सकती है।









