दिल्ली में मुफ्त और सस्ती बिजली का लाभ लेने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव हुआ है। दिल्ली सरकार ने Delhi Aadhaar power subsidy नियम के तहत बिजली सब्सिडी पाने के लिए आधार आधारित KYC अनिवार्य कर दिया है। ऊर्जा विभाग ने उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद योजना में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की और इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। अब उपभोक्ताओं को अपनी-अपनी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को आधार का विवरण देना होगा, तभी सब्सिडी का लाभ मिलता रहेगा।
सरकार का कहना है कि इस कदम से सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी दावों पर रोक लगेगी। खासतौर पर एक ही नाम पर दर्ज डुप्लिकेट कनेक्शनों की पहचान आसान होगी, ताकि लाभ सही और पात्र लोगों तक पहुंच सके। आधार अधिनियम, 2016 की धारा 7 का हवाला देते हुए जारी आदेश में आधार प्रमाण को लाभ पाने की शर्त बनाया गया है।
कैसे पूरी करें KYC प्रक्रिया
उपभोक्ता अपनी डिस्कॉम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आधार का विवरण दर्ज कर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। जिन्होंने अभी तक आधार के लिए नामांकन नहीं कराया है, उन्हें पहले इसके लिए आवेदन करना होगा। प्रक्रिया के अनुसार, ऐसे उपभोक्ता अपना 14 अंकों का आधार नामांकन आईडी देकर सब्सिडी का लाभ ले सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे सत्यापन आसान होगा, कागजी काम कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
दिल्ली में यह योजना 5 वितरण एजेंसियों के जरिए चलती है — बीएसईएस राजधानी पावर, बीएसईएस यमुना पावर, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES)। हर एजेंसी अपने तय क्षेत्र में योजना का संचालन करती है।
किसे मिलता है कितना लाभ
मौजूदा योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली खपत के आधार पर लाभ मिलता है। 200 यूनिट तक की मासिक खपत पर बिजली का बिल शून्य रहता है, जबकि 201 से 400 यूनिट के बीच 50 फीसदी सब्सिडी मिलती है, जिसकी मासिक सीमा 800 रुपये तय है।
Delhi Aadhaar Power Subsidy: 4000 करोड़ के पार पहुंचा बोझ
सब्सिडी पर सरकार का खर्च लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में 52.3 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिला, जो कुल 73 लाख उपभोक्ताओं का करीब 84 फीसदी था। 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 55 लाख यानी 87 फीसदी हो गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक बिजली सब्सिडी पर सरकार का आवंटन 4,037.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गया — यानी 4,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार हो चुका है।
सरकार भविष्य में प्रति उपभोक्ता एक कनेक्शन तक सब्सिडी सीमित करने पर भी विचार कर रही है, हालांकि इसे अभी अंतिम नियम के रूप में तय नहीं किया गया है। पिछले एक दशक में दिल्ली का कुल बिजली उपभोक्ता आधार करीब 40 फीसदी बढ़कर 73 लाख से अधिक हो चुका है।
ऊर्जा विभाग का मानना है कि अनिवार्य KYC से लाभार्थियों का सत्यापन पुख्ता होगा और एक ही व्यक्ति के कई कनेक्शनों से हो रहे दुरुपयोग पर लगाम लगेगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे सब्सिडी का पैसा सही हकदारों तक पहुंचेगा और सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ घटेगा। हालांकि उपभोक्ताओं को समय पर प्रक्रिया पूरी करनी होगी, क्योंकि KYC न कराने पर सब्सिडी रुक भी सकती है।















