कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार 3 अक्टूबर को ‘सत्याग्रह’ नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। इसका मकसद देशभर में अलग-अलग जगहों पर चल रहे आंदोलनों और जनशिकायतों को एक साझा मंच पर लाना है।
क्या है सत्याग्रह प्लेटफॉर्म
राहुल गांधी के मुताबिक, देशभर में लोग अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन अक्सर अकेले लड़ रहे हैं। छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएं और युवा — हर संघर्ष की अपनी कहानी है, पर अकेली उठी आवाज़ अक्सर दब जाती है। ‘सत्याग्रह’ पहल इन्हीं आवाज़ों को एक नक्शे पर साथ लाने का प्रयास है। नागरिक rahulgandhi.in/satyagraha पर जाकर करीब दो मिनट में अपनी कहानी दर्ज करा सकते हैं, जो फिर देशभर के नक्शे पर पिन के रूप में दिखेगी। इससे समान समस्याओं से जूझ रहे लोग एक-दूसरे को देख और जुड़ सकेंगे।
किन मुद्दों को मिलेगा मंच
इस प्लेटफॉर्म पर ज़मीन के अधिकार, किसानों के मुद्दे, महिला सुरक्षा, दलित और ओबीसी अधिकार, शिक्षा, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और स्वास्थ्य जैसे विषयों से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी। राहुल गांधी ने कहा कि वह इन मुद्दों को संसद में, सड़कों पर और पत्रों के माध्यम से उठाने का प्रयास करेंगे। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस पहल का लक्ष्य बिखरे प्रतिरोध को एकजुट करना है। लॉन्च के करीब नौ घंटों के भीतर ही 10,000 से ज्यादा लोगों और समूहों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया।
गांधी जयंती के अगले दिन लॉन्च
यह प्लेटफॉर्म 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के ठीक अगले दिन लॉन्च किया गया। राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के दर्शन का हवाला देते हुए कहा कि बापू ने सिखाया था कि सत्य सबसे बड़ा हथियार है, लेकिन सत्य के साथ खड़ा होना उससे भी बड़ा हथियार है। गौरतलब है कि इसी बीच असम में रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने 19 जुलाई की आपदा के पीड़ितों को राहत राशि न मिलने के विरोध में विधानसभा परिसर में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह भी शुरू किया है।









