वोटर लिस्ट से नाम हटने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘स्पेशल ड्राइव’ चलाने का निर्देश दिया है, जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसका मकसद छूट गए योग्य मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ना है।
फॉर्म 6 से जुड़ेगा नाम
चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिए थे। गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी इन्हें दोहराया गया। आयोग ने साफ किया कि एसआईआर पूरी हो चुके राज्यों में नाम जुड़वाने के लिए सामान्य फॉर्म 6 इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए एसआईआर के दौरान मांगा गया अतिरिक्त घोषणा पत्र जरूरी नहीं होगा, क्योंकि वह सिर्फ उस खास अवधि के लिए था।
घर-घर जाकर मदद के निर्देश
आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे वोटर लिस्ट को लगातार अपडेट रखें और छूटे योग्य लोगों की मदद करें। एसआईआर से पहले और बाद की सूचियों की तुलना कर उन मतदाताओं की पहचान की जाए, जिनके नाम बिना ठोस वजह गायब हुए हैं। अगर किसी का नाम दूसरी जगह नहीं जुड़ा, डुप्लीकेट नहीं है और मृत्यु नहीं हुई है, तो ऐसे मामलों की विशेष जांच होगी। जरूरत पड़ने पर बीएलओ घर जाकर फॉर्म 6 भरवाएंगे।
गोवा के 97 मतदाताओं को राहत
इस अभियान में राजनीतिक दलों और उनके बूथ लेवल एजेंटों की भी मदद ली जाएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब 30 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से हटने की जांच चल रही है। गोवा के 97 योग्य मतदाताओं के मामले में भी यह अभियान मददगार रहा, जिनके नाम अंतिम सूची में नहीं आए थे। जिन राज्यों में एसआईआर जारी है, वहां ‘अनमैप्ड’ नोटिस पाने वालों को दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे — बीएलओ खुद घर आकर दस्तावेज लेंगे और पोर्टल पर अपलोड करेंगे।









