समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर तीखा हमला बोला है। कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद भी उनके साथ थे। दोनों नेताओं ने अखिलेश के बयानों का जवाब देते हुए सपा शासन और योगी शासन की तुलना पेश की।
चुनाव चिह्न के ‘दुरुपयोग’ का आरोप
राजभर ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने सुभासपा के सिंबल पर चुपचाप अपने 12 प्रत्याशी मैदान में उतार दिए थे। यह उनके साथ बड़ा धोखा था। सपा में हाल में शामिल हुए नेताओं को उन्होंने ‘दगे हुए कारतूस’ बताते हुए कहा कि ये नेता कभी बसपा में होते हैं, कभी सपा में और कभी किसी और दल में चले जाते हैं। ऐसे आया-राम गया-राम नेताओं से वोट नहीं मिलता।
शिक्षा और रोजगार पर दो टूक
मोबाइल और शिक्षा के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि बिना अच्छी शिक्षा के नौकरी नहीं मिलेगी। मोबाइल से मिलने वाली ज्ञानवर्धक जानकारी पर ही अमल करना चाहिए। निवेश को लेकर उन्होंने कहा कि अखिलेश के दौर में यूपी में कोई बड़ा निवेशक नहीं आया, जबकि अब सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियां यहां निवेश कर रही हैं।
‘शिवपाल चाचा’ वाली टिप्पणी
भर्तियों पर राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में नौकरियों के विज्ञापन निकलते ही बोलियां लगने लगती थीं। ‘शिवपाल चाचा एंड कंपनी’ सक्रिय हो जाती थी और पद के हिसाब से 10 से 25 लाख रुपये तक की बोली लगती थी। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीपीएससी में अयोग्य अध्यक्ष की नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। योगी सरकार में 10 लाख युवाओं को पारदर्शी भर्तियों से नौकरी मिली है।
दंगों का हिसाब और अयोध्या पर तंज
कानून-व्यवस्था की तुलना करते हुए राजभर ने कहा कि अखिलेश के कार्यकाल में एक हजार से अधिक दंगे हुए, जबकि योगी राज में एक भी दंगा नहीं हुआ। सपा दौर में माफिया हथियार लहराते घूमते थे, आज वे मिट्टी में मिल चुके हैं। डॉ. निषाद ने अखिलेश के अयोध्या दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें राम के साथ निषादराज के दर्शन कर माफी मांगनी चाहिए।









