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‘केमिकल छोड़ो, गोबर अपनाओ…’ खुद खेत जोतकर सीएम धामी ने उत्तराखंड के किसानों से कर दी ये भावुक अपील

By: Sansar Live Team

On: Monday, June 15, 2026 9:10 AM

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर अपने बेहद साधारण और जमीनी अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। सोमवार को खटीमा के नगला तराई स्थित अपने निजी आवास पर सीएम धामी बिल्कुल अलग रंग में नजर आए। उन्होंने किसी वीआईपी की तरह सिर्फ दौरा नहीं किया, बल्कि खुद खेत में उतरे, हाथों में टिलर (पावर टिलर मशीन) थामी और पूरे खेत की जुताई कर डाली। मुख्यमंत्री को इस तरह खेत में पसीना बहाते देख हर कोई हैरान रह गया। इस दौरान उनकी माता जी, श्रीमती बिशना देवी भी खेत में उनके साथ मौजूद रहीं और बेटे का हौसला बढ़ाया।

खेत में डाला गोबर का खाद, दिया जैविक खेती का मंत्र

खेत की जुताई करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने खेत में गोबर की प्राकृतिक खाद भी डाली। ऐसा करके उन्होंने प्रदेश के किसानों को पारंपरिक और जैविक (ऑर्गेनिक) खेती को अपनाने का एक बड़ा और सीधा संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी सिर्फ पेट भरने या आजीविका चलाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय संस्कृति और गांवों की अर्थव्यवस्था की असली आत्मा है। अगर हम आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ अपनी पुरानी पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को जोड़ दें, तो खेती को बहुत ज्यादा मुनाफेदार और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

केमिकल वाली खाद छोड़ें किसान, सरकार दे रही है पूरा साथ

सीएम धामी ने रासायनिक उर्वरकों (केमिकल वाली खाद) के नुकसान गिनाते हुए किसानों से एक खास अपील की। उन्होंने कहा कि गोबर की खाद जैसी प्राकृतिक चीजें हमारी धरती मां की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाती हैं और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखती हैं। किसानों को अब केमिकल वाली खाद पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए और जैविक खेती की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड सरकार किसानों की कमाई बढ़ाने, खेती को हाईटेक बनाने और जैविक उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।

युवाओं को खेती से जोड़ने की है बड़ी जरूरत

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि उत्तराखंड की असली पहचान यहां के खेतों, गांवों की संस्कृति और खूबसूरत प्रकृति से ही है। राज्य सरकार पारंपरिक खेती, बागवानी और स्थानीय पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई शानदार योजनाएं चला रही है, जिसके जरिए किसानों को सीधी मदद दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत यह है कि हमारी युवा पीढ़ी भी खेती और ग्रामीण विकास से जुड़े, ताकि पहाड़ों में रोजगार के नए रास्ते खुल सकें।

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