उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में मानसून की रफ्तार तेज होते ही मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। पहाड़ों में रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश अब आम लोगों के साथ-साथ चारधाम यात्रियों के लिए भी बड़ी आफत बन चुकी है। मौसम विज्ञान केंद्र ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सूबे के चार बेहद संवेदनशील जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से बेवजह घरों से बाहर न निकलने और पहाड़ी रास्तों पर सफर न करने की अपील की है।
दरअसल, इस मानसूनी बारिश के कारण पहाड़ों से लगातार मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं, जिससे पूरे राज्य में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में इस समय करीब 30 मुख्य और संपर्क मार्ग मलबे की चपेट में आने से पूरी तरह ठप हो चुके हैं। सड़कों के बंद होने से सीमांत और ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट गया है, जिससे स्थानीय लोगों के सामने रोजमर्रा के सामान का संकट भी खड़ा होने लगा है।
बीच रास्ते फंसे सैकड़ों श्रद्धालु, जेसीबी मशीनें तैनात
बारिश और भूस्खलन की सबसे ज्यादा मार इस समय चारधाम यात्रा रूटों पर पड़ रही है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति सबसे खराब है, जहां कई जगहों पर पहाड़ों से भारी बोल्डर टूटकर मुख्य सड़क पर आ गिरे हैं। हाईवे बंद होने की वजह से यमुनोत्री धाम के दर्शन करने जा रहे और वहां से लौट रहे सैकड़ों श्रद्धालु बीच रास्ते में ही फंस गए हैं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर मुस्तैद हैं। मलबे को हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, लेकिन लगातार हो रही रुक-रुक कर बारिश रेस्क्यू ऑपरेशन में बार-बार बाधा डाल रही है।
इन 4 जिलों में अगले 48 घंटे भारी, मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर सहित चार जिलों के लिए विशेष तौर पर भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। बताया जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ों पर अचानक होने वाली इस तेज बारिश से लैंडस्लाइड का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है, इसलिए बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
उफान पर नदी-नाले, रात में सफर न करने की सख्त हिदायत
लगातार हो रही बारिश के चलते पहाड़ी नदी-नाले उफान पर आ गए हैं, जिससे मैदानी इलाकों में भी जलस्तर बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। स्थिति को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस प्रशासन को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए एक गाइडलाइन जारी की है, जिसमें उफनते नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों से दूर रहने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि इस मौसम में खासकर रात के समय पहाड़ों में सफर करने से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि अंधेरे में भूस्खलन का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
