उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। खासकर राजधानी देहरादून में भारी बारिश और जलभराव के पुराने कड़वे अनुभवों को देखते हुए इस बार तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। राजधानी में मानसून के दौरान कोई बड़ी अनहोनी न हो और आम जनता को जलभराव या भूस्खलन से न जूझना पड़े, इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है। इसी कड़ी में प्रमुख सचिव और देहरादून के जनपद प्रभारी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने जिला कार्यालय सभागार में देहरादून में मानसून पूर्व तैयारियां और आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक की।
दरअसल, पिछले कुछ सालों में देहरादून के कई इलाकों में अचानक होने वाली तेज बारिश (शॉर्ट ड्यूरेशन हाई इंटेंसिटी रेनफॉल) ने प्रशासन के दावों की पोल खोली थी। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की मौजूदगी में हुए इस मंथन में हर एक संवेदनशील प्वाइंट की बारीकी से समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने साफ लहजे में अधिकारियों से कह दिया है कि लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है और मानसून शुरू होने से पहले सभी पेंडिंग काम हर हाल में पूरे हो जाने चाहिए।
ISBT पर जलभराव और नदी-नालों की सफाई पर बड़ा फैसला
बैठक में देहरादून का सबसे बड़ा सिरदर्द माने जाने वाले आईएसबीटी (ISBT) क्षेत्र में जलभराव की समस्या पर विशेष चर्चा हुई। हर बार बारिश में यह इलाका टापू बन जाता है। इस बार इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए एमडीडीए, लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर निगम, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की एक संयुक्त टीम बनाने का फैसला लिया गया है, जो मिलकर काम करेगी। इसके साथ ही शहर के 12 प्रमुख नालों की सफाई और मरम्मत का काम तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि जिले के कुल 169 नालों में से 153 की सफाई पूरी हो चुकी है और बाकी पर काम तेजी से चल रहा है।
लैंडस्लाइड जोन पर पैनी नजर और गर्भवती महिलाओं के लिए खास प्लान
पहाड़ी रास्तों और संवेदनशील इलाकों की बात करें तो देहरादून जिले में 12 लैंडस्लाइड जोन और क्रॉनिक स्लिप जोन की पहचान की गई है। किमाड़ी जैसे अत्यधिक संवेदनशील रास्तों पर भूस्खलन के खतरे को कम करने के लिए एक लॉन्ग-टर्म प्लान बनाने को कहा गया है। असल में, सबसे ज्यादा चिंता उन दूरदराज के गांवों की है जो बारिश में मुख्य मार्गों से कट जाते हैं। प्रशासन ने ऐसे 73 गांवों की पहचान की है जहां कनेक्टिविटी की समस्या आ सकती है। इन गांवों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए उन्हें मानसून से पहले ही नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराने की एडवांस व्यवस्था की गई है, जहां उनके और तीमारदारों के रहने-खाने का खर्च विभाग उठाएगा। इसके अलावा, मानसून के दौरान प्रभावित होने वाले 89 ऐसे स्कूलों को भी चिह्नित किया गया है जिनके रास्ते में नदी-नाले पड़ते हैं।
डेंगू-मलेरिया से निपटेगा स्वास्थ्य विभाग, 24 घंटे एक्टिव रहेगा वार रूम
जलभराव के बाद पनपने वाली बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग को अभी से फॉगिंग और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। लीकेज मैपिंग के दौरान सामने आए 18 वॉटर लीकेज प्वाइंट्स को भी ठीक किया जा रहा है ताकि पीने का पानी दूषित न हो। इसके साथ ही, तेज हवाओं में जर्जर पेड़ों के गिरने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए वन विभाग को एक्शन लेने के लिए कहा गया है। आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का वार रूम और कंट्रोल रूम अब से 24×7 एक्टिव रहेगा।
बैठक के बाद प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के साथ खुद फील्ड में उतरकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कार्लीगाड़ और मझाड़ा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और वहां चल रहे पुनर्वास व नदी चैनलाइजेशन के कार्यों को देखा, ताकि जमीनी हकीकत का सही अंदाजा लगाया जा सके।
