देहरादून: उत्तराखंड के नाम आज एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है। देवभूमि उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षरता का बड़ा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से तय किए गए कड़े पैमानों के अनुरूप एक राज्यव्यापी व्यापक अभियान चलाया था। इस मुहिम का नतीजा यह रहा कि उत्तराखंड ने बहुत ही कम समय में देश का छठा शत-प्रतिशत यानी पूर्ण साक्षर राज्य बनने का ऐतिहासिक गौरव हासिल कर लिया है। इस बड़ी कामयाबी से पूरे प्रदेश में जश्न और उत्साह का माहौल है।
दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) के तहत केंद्र सरकार ने साक्षरता की पुरानी परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है। अब सिर्फ अपना नाम पढ़ना-लिखना जान लेना ही साक्षरता नहीं है, बल्कि नई परिभाषा के अनुसार समझ के साथ पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणना (हिसाब-किताब) करने की क्षमता का होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही आज के दौर में डिजिटल साक्षरता और वित्तीय साक्षरता जैसे जरूरी जीवनोपयोगी कौशलों को भी साक्षरता का मुख्य हिस्सा माना गया है।
केंद्र सरकार ने इस नीति में यह भी साफ किया है कि बढ़ती उम्र, गंभीर बीमारी और बौद्धिक अक्षमता जैसी कुछ विशेष परिस्थितियों की वजह से जमीन पर वास्तविक रूप से बिल्कुल 100 फीसदी साक्षरता हासिल करना संभव नहीं है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने नियम बनाया है कि अगर कोई राज्य 95 प्रतिशत या उससे अधिक की साक्षरता दर हासिल कर लेता है, तो उसे ‘पूर्ण साक्षर’ घोषित करने के लिए पर्याप्त माना जाएगा। उत्तराखंड ने इस मानक को न सिर्फ छुआ, बल्कि उससे काफी आगे निकलते हुए 98.7 प्रतिशत की बेमिसाल साक्षरता दर हासिल कर दिखाई है।
उल्लास कार्यक्रम के जरिए हुई असली निरक्षरों की पहचान
उत्तराखंड में इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचने की शुरुआत सबसे पहले ‘उल्लास’ (अंडरस्टैंडिंग लाइफलांग लर्निंग फार आल इन सोसायटी) कार्यक्रम के तहत की गई थी। इस विशेष योजना के जरिए राज्य के कोने-कोने में रहने वाले निरक्षर व्यक्तियों की बारीकी से पहचान की गई। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के कुशल निर्देशन में पूरे प्रदेश में एक विस्तृत सर्वे और डेटा विश्लेषण का काम कराया गया। इसके बाद साल 2025 में पूरे राज्य में साक्षर और निरक्षर व्यक्तियों का सटीक आकलन कर वास्तविक स्थिति का निर्धारण किया गया।
दो साल में साक्षरता दर में 14.9 प्रतिशत का तगड़ा उछाल
इस व्यापक और जमीनी सर्वेक्षण के आधार पर उत्तराखंड की वर्तमान साक्षरता दर लगभग 98.7 प्रतिशत आंकी गई है। यह आंकड़ा केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण साक्षरता के लिए तय किए गए 95 प्रतिशत के अनिवार्य मानक से काफी ज्यादा है। शिक्षा निदेशालय ने साल 2023-24 के पुराने सरकारी आंकड़ों का भी गहराई से अध्ययन किया, जिसमें राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत दर्ज थी। इस लिहाज से देखें तो उत्तराखंड ने महज दो वर्षों के भीतर अपनी साक्षरता दर में 14.9 प्रतिशत की एक ऐतिहासिक और उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।
केंद्रीय मानकों को पछाड़कर बहुत आगे निकला देवभूमि
आंकड़ों के गणित को समझें तो उत्तराखंड में सात वर्ष से अधिक आयु की कुल आबादी लगभग 1 करोड़ 23 लाख 46 हजार आंकी गई है। केंद्रीय मानकों के हिसाब से पूर्ण साक्षर बनने के लिए राज्य में निरक्षर लोगों की संख्या 5 लाख 11 हजार 731 से कम होनी चाहिए थी। लेकिन जब सरकार ने असल सर्वे कराया तो सामने आया कि पूरे उत्तराखंड में केवल 1 लाख 31 हजार 986 व्यक्ति ही ऐसे बचे हैं जो निरक्षर हैं।
यह संख्या राज्य की कुल आबादी का मात्र 1.3 प्रतिशत ही है। इसी मजबूत आधार पर राज्य की साक्षरता दर 98.7 प्रतिशत तय की गई, जो पूर्ण साक्षरता के केंद्रीय मानक से कहीं अधिक है और इसी के दम पर राज्य खुद को पूर्णतः साक्षर घोषित करने का हकदार बना है। शिक्षा निदेशालय ने पूर्ण साक्षरता से जुड़ा यह ऐतिहासिक प्रस्ताव राज्य कैबिनेट के सामने रखा था, जिसे मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से अपनी मंजूरी दे दी है। अब इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर केंद्र सरकार को अवगत कराने की कागजी औपचारिकता पूरी की जा रही है।
देश के वो 6 राज्य जिन्हें मिला पूर्ण साक्षरता का गौरव
देश में उत्तराखंड से पहले पांच अन्य राज्य भी खुद को पूर्ण साक्षर घोषित कर चुके हैं। आइए देखते हैं कि उत्तराखंड इस खास क्लब में कौन से नंबर पर है और बाकी राज्यों की क्या स्थिति है:
| राज्य का नाम | पूर्ण साक्षर घोषित होने का वर्ष | कुल साक्षरता (प्रतिशत में) |
| मिजोरम | 2025 | 98.2% |
| गोवा | 2025 | 99.7% |
| त्रिपुरा | 2025 | 95.6% |
| हिमाचल प्रदेश | 2025 | 99.3% |
| सिक्किम | 2026 | 99.82% |
| उत्तराखंड | 2026 | 98.7% |
उत्तराखंड का देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनना हर एक प्रदेशवासी के लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। पहाड़ों और दुर्गम इलाकों से घिरे इस छोटे से राज्य ने बेहद सीमित समय के भीतर शिक्षा के क्षेत्र में यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस शानदार कामयाबी और इतिहास रचने के लिए सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई!
