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Cerebral Palsy को दी मात! चमोली की दुर्गम पहाड़ियों में इस युवा ने दौड़कर रच दिया इतिहास, देखने वाले रह गए दंग

By: Sansar Live Team

On: Monday, June 1, 2026 5:41 PM

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चमोली, 01 जून 2026 (सू.वि.): इंसान के हौसले अगर बुलंद हों, तो आसमान की ऊंचाइयां भी छोटी लगने लगती हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है 25 साल के जांबाज अनुराग रावत ने। उत्तराखंड के चमोली में चल रही “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” में अनुराग ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना करना भी आम इंसान के लिए मुश्किल है। सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) जैसी गंभीर शारीरिक चुनौती को मात देकर अनुराग ने नीति घाटी के बेहद कठिन रास्तों पर 10 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। जिसने भी अनुराग का यह जज्बा देखा, वो दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गया।

कठिन रास्तों पर 1 घंटा 45 मिनट का वो जादुई सफर

चमोली जनपद में 31 मई से 2 जून तक आयोजित हो रही इस “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” में अनुराग रावत ने अपने अटूट आत्मविश्वास का परिचय दिया। उन्होंने लगभग 1 घंटा 45 मिनट में 10 किलोमीटर की बेहद कठिन और चढ़ाई वाली दौड़ को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस रेस का ऑफिशियल स्लोगन था “Beyond Limits, Beyond the Canyon” (सीमाओं के पार, घाटियों के पार), और अनुराग ने अपनी इस कामयाबी से इस संदेश को सच साबित कर दिखाया। उन्होंने दुनिया को बता दिया कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो शरीर की कोई भी कमजोरी आड़े नहीं आ सकती।

दिल्ली में रहते हैं अनुराग, पौड़ी से है गहरा नाता

मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के रहने वाले अनुराग रावत फिलहाल दिल्ली में रह रहे हैं। सेरेब्रल पाल्सी जैसी दिव्यांगता के शिकार होने के बावजूद अनुराग के सपनों में कभी कोई कमी नहीं आई। नीति घाटी का यह इलाका अपने ऊंचे पहाड़ों, पथरीले रास्तों और सबसे बढ़कर ‘कम ऑक्सीजन’ के लिए जाना जाता है। ऐसी विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जहां अच्छे-अच्छे धावकों की सांसें फूलने लगती हैं, वहां अनुराग का यह प्रदर्शन हर किसी के लिए एक मिसाल बन गया है।

यह सिर्फ एक दौड़ नहीं, जिंदगी जीने की सीख है

नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन में अनुराग की यह जीत सिर्फ एक मेडल या सर्टिफिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिंदगी की हर मुश्किल से लड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा है। आयोजन में मौजूद हर एक दर्शक और बाकी प्रतिभागी अनुराग का जोश देखकर खुद को तालियां बजाने से नहीं रोक पाए। अनुराग ने साबित कर दिया कि दिव्यांगता केवल शरीर में होती है, इंसान की क्षमताओं में नहीं। रेस पूरी करने के बाद अनुराग ने मुस्कुराते हुए बताया कि वो इससे पहले भी कई बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं और आगे भी रुकने वाले नहीं हैं।

“सीमाएं सिर्फ दिमाग में होती हैं”

अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर बात करते हुए अनुराग रावत ने एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली बात कही। उन्होंने कहा, “सीमाएं केवल हमारे दिमाग में होती हैं। अगर आपका संकल्प मजबूत है, तो इंसान अपने शरीर को किसी भी मंजिल तक पहुंचा सकता है।” अनुराग की यह सोच वाकई उन लाखों लोगों के लिए संजीवनी का काम करेगी जो छोटी-मोटी दिक्कतों से हार मान लेते हैं।

देशभर से जुटे 1200 से ज्यादा जांबाज

आपको बता दें कि सीमांत नीति घाटी में आयोजित हो रहा यह एडवेंचर स्पोर्ट्स महाकुंभ इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” के इस भव्य आयोजन में भारत के कोने-कोने से लोग पहुंचे हैं। देश के 27 अलग-अलग राज्यों से आए 1200 से अधिक प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया है। अलग-अलग श्रेणियों में हो रही इस प्रतियोगिता में देश के युवा अपने अदम्य साहस, गजब के उत्साह और सच्ची खेल भावना का प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच अनुराग रावत ने जो कहानी लिखी है, उसने इस पूरे आयोजन को अमर बना दिया है।

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