देहरादून: उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है और इस बार यह बदलाव पहाड़ों से लेकर मैदानों तक भारी पड़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी 4 और 5 मई को राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (SEOC) की ओर से सभी जिलाधिकारियों को बाकायदा पत्र भेजकर हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, मई के पहले हफ्ते में होने वाली यह मौसमी हलचल पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। मौसम विभाग ने देहरादून समेत राज्य के सात जिलों के लिए Orange Alert जारी किया है। इन इलाकों में न केवल आसमानी बिजली गिरने की आशंका है, बल्कि 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली झोंकेदार हवाएं भी भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इन जिलों में दिखेगा मौसम का रौद्र रूप
मौसम विभाग की मानें तो 4 और 5 मई का दिन उत्तराखंड के लिए काफी संवेदनशील रहने वाला है। देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में मौसम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) और भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मैदानी इलाकों में चलने वाली तेज हवाएं पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसे लेकर स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा, 5 मई को पहाड़ों के ऊपरी हिस्सों यानी उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी भारी बारिश और ओलावृष्टि का ‘ऑरेंज अलर्ट’ रहेगा। असल में, यह समय उत्तराखंड में पर्यटन और यात्रा के लिहाज से काफी व्यस्त रहता है, ऐसे में खराब मौसम की चेतावनी ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राज्य के अन्य हिस्सों के लिए भी 2 से 6 मई तक ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है, यानी पूरे प्रदेश में फिलहाल मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ ही रहेगा।
ट्रेकिंग पर पाबंदी और विभाग अलर्ट मोड पर
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सभी जिलों को उच्च सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सचिव ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आपदा की स्थिति में ‘रिस्पांस टाइम’ कम से कम होना चाहिए ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में चल रही ट्रेकिंग गतिविधियों को नियंत्रित करने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि संवेदनशील इलाकों में आपदा प्रबंधन की टीमों (SDRF/NDRF) को तैनात रहने को कहा गया है।
प्रशासन की प्राथमिकता रास्तों को खुला रखना है। इसी सिलसिले में लोक निर्माण विभाग (PWD), बीआरओ (BRO), राष्ट्रीय राजमार्ग और पीएमजीएसवाई को अलर्ट किया गया है। निर्देश दिए गए हैं कि यदि भारी बारिश या भूस्खलन के कारण सड़कें बंद होती हैं, तो मशीनों और मैनपावर के जरिए उन्हें तत्काल खुलवाया जाए।
संचार माध्यमों को सक्रिय रखने के निर्देश
आमतौर पर आपदा के समय सबसे बड़ी चुनौती संचार व्यवस्था को बनाए रखने की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन ने सभी अधिकारियों को अपने मोबाइल और संचार माध्यम हर समय ऑन रखने को कहा है। ग्राम स्तर तक के अधिकारियों को सक्रिय रहने की हिदायत दी गई है ताकि अगर कहीं कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी सूचना तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचे।
इसके साथ ही स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गाइडलाइन जारी की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में आपदा उपकरणों और संसाधनों को पूरी तरह तैयार रखें। स्थानीय लोगों और पर्यटकों से भी अपील की गई है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही शरण लें।
कुल मिलाकर, आने वाले दो-तीन दिन उत्तराखंड के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकते हैं। प्रशासन की मुस्तैदी और जनता की सावधानी ही इस संभावित प्राकृतिक आपदा के प्रभाव को कम कर सकती है।
