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उत्तराखंड में अब ‘इंटर पास’ नहीं बन पाएंगे वन दरोगा! धामी कैबिनेट के 18 बड़े फैसलों ने बदला नियम, युवाओं और ठेकेदारों की लगी लॉटरी

By: Sansar Live Team

On: Thursday, April 30, 2026 10:02 AM

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक (Uttarakhand Cabinet Meeting 2026) में प्रदेश के विकास और युवाओं के भविष्य को लेकर कई क्रांतिकारी फैसले लिए गए हैं। सचिवालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में कुल 18 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने इस बार सरकारी नौकरियों के मानक बदलने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर भी अपनी तिजोरी खोल दी है।

वन विभाग की भर्तियों में बड़ा बदलाव: अब डिग्री है जरूरी

धामी सरकार ने उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली में बड़ा संशोधन करते हुए वन दरोगा भर्ती के नियमों को बदल दिया है। अब इस पद के लिए केवल इंटरमीडिएट पास होना काफी नहीं होगा, बल्कि अभ्यर्थी का स्नातक (ग्रेजुएशन) होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने आयु सीमा में भी राहत दी है; वन दरोगा के लिए अधिकतम आयु सीमा अब 35 वर्ष कर दी गई है। वन आरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) के लिए आयु 18 से 25 वर्ष तय की गई है। साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD) में दिव्यांगों के लिए बैकलॉग पदों को भरने का रास्ता भी साफ हो गया है।

कुंभ मेले की तैयारी और नई बसों की सौगात

आगामी कुंभ मेले को भव्य और सुगम बनाने के लिए सरकार ने अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी की है। अब कुंभ मेला अधिकारी 1 करोड़ और गढ़वाल कमिश्नर 5 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट्स को खुद ही मंजूरी दे सकेंगे, जिससे फाइलें शासन में नहीं अटकेंगी। परिवहन विभाग के लिए भी अच्छी खबर है; सरकार अब 250 नई बसें खरीदने जा रही है। जीएसटी की दरों में कमी का फायदा उठाते हुए बसों की संख्या को बढ़ाया गया है, जिससे प्रदेश के यात्रियों को राहत मिलेगी।

मदरसों के लिए नई नीति और शिक्षा में सुधार

प्रदेश के 452 मदरसों को लेकर सरकार ‘अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’ का अध्यादेश लाने की तैयारी में है। इसके तहत कक्षा 1 से 8 तक के मदरसों को अब जिला स्तर पर मान्यता मिल सकेगी। हालांकि, जो मदरसे 12वीं तक की पढ़ाई करवा रहे हैं, उन्हें उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से जुड़ना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसे 21 अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों के लिए भी लागू कर दिया गया है।

ठेकेदारों की मौज और राजस्व बढ़ाने पर जोर

स्थानीय ठेकेदारों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘D’ श्रेणी के ठेकेदारों की कार्य सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गई है। वहीं, राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए खनन रॉयल्टी की दर में 1 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की गई है। पर्यावरण और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए वन क्षेत्रों में मौन पालन (मधुमक्खी पालन) को बढ़ावा देने के लिए भी नई नीति पर सहमति बनी है।

प्रमुख संशोधनों पर एक नजर

क्षेत्रमुख्य बदलाव / निर्णय
वन विभागवन दरोगा योग्यता अब स्नातक; आयु सीमा 21-35 वर्ष।
परिवहन250 नई बसों की खरीद को मंजूरी; टैक्स बचत का लाभ।
कुंभ मेलामेला अधिकारी को 1 करोड़ और कमिश्नर को 5 करोड़ तक की पावर।
शिक्षा1-8 तक के मदरसों को जिला स्तर से मान्यता का प्रावधान।
ठेकेदारीD श्रेणी ठेकेदारों के लिए काम की सीमा 1.50 करोड़ हुई।
खननरॉयल्टी दर में 1 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी।

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