देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल एक बार फिर अपने संवेदनशील अंदाज और त्वरित फैसलों के लिए चर्चा में हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति (डीसीडब्ल्यूपीसी) की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने न केवल सरकारी योजनाओं की प्रगति जांची, बल्कि मौके पर ही कई मानवीय फैसले लेकर यह संदेश दिया कि प्रशासन आम आदमी और खास तौर पर बेसहारा बच्चों के साथ खड़ा है।
दरअसल, इस बैठक के दौरान एक भावुक पल तब आया जब जिलाधिकारी ने राजकीय शिशु सदन केदारपुरम की दिवंगत संविदा कर्मचारी स्वर्गीय सुनिता सिंह की बेटी को मदद का हाथ बढ़ाया। सुनिता सिंह के निधन के बाद उनका परिवार आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहा था, जिसे देखते हुए डीएम ने उनकी बेटी की शिक्षा और आर्थिक सहयोग के लिए तत्काल 25,000 रुपये का चेक प्रदान किया। उन्होंने साफ कहा कि सरकार और प्रशासन ऐसे जरूरतमंद परिवारों की प्राथमिकता के आधार पर मदद करना जारी रखेगा।
नारी निकेतन और मानसिक दिव्यांगों के लिए ‘ऑन द स्पॉट’ बजट
बैठक के दौरान जब जिलाधिकारी के सामने नारी निकेतन और मानसिक चिकित्सालय में स्टाफ की कमी का मुद्दा उठा, तो उन्होंने फाइलों का इंतजार करने के बजाय मौके पर ही समाधान निकाला। बताया जा रहा है कि नारी निकेतन में रहने वाले मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों, महिलाओं और किशोरियों के बेहतर उपचार के लिए स्टाफ और केयरटेकर की सख्त जरूरत थी।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए जिला योजना से तत्काल बजट की स्वीकृति दे दी। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) को निर्देशित किया कि वे नर्सों और अन्य स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि वहां रह रहे लोगों को इलाज में कोई असुविधा न हो।
पीएम केयर्स के बच्चों से संवाद और भविष्य की चिंता
समीक्षा बैठक का एक अहम हिस्सा ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के लाभार्थी बच्चों के साथ जिलाधिकारी का सीधा संवाद रहा। डीएम ने बच्चों से उनके हाल-चाल पूछे और उनके अभिभावकों से भी विस्तार से बात की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि इन बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास में कोई कोताही न बरती जाए। असल में, प्रशासन का लक्ष्य इन बच्चों को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य देना है, जो आपदा या अन्य कारणों से अपने माता-पिता को खो चुके हैं।
जिले में बाल संरक्षण की स्थिति: 19 बालगृहों में 275 बच्चे
बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट ने जिले के बाल संरक्षण ढांचे का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि देहरादून में वर्तमान में 19 राजकीय और स्वैच्छिक बालगृह संचालित हैं, जिनमें 275 बालक-बालिकाएं रह रहे हैं। जिलाधिकारी ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल कल्याण समिति के कामकाज की भी समीक्षा की। आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से अब तक कुल 2041 मामले सामने आए हैं, जिन पर समिति लगातार कार्रवाई कर रही है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए ‘ऑपरेशन मुक्ति’ जैसे प्रयासों को और तेज किया जाए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सीएमओ डॉ. मनोज कुमार और शिक्षा विभाग समेत कई विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे। डीएम ने अंत में दोहराया कि बाल संरक्षण से जुड़े मानकों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी संस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग होती रहेगी।
