अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो अगले सप्ताह भारत के दौरे पर आ रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने 13 अक्टूबर को जारी मीडिया नोट में बताया कि Marco Rubio India visit 17 से 22 अक्टूबर के बीच होगा। इस दौरे में रूबियो पहले उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे और फिर भारत में मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे। यह इस साल उनकी दूसरी आधिकारिक भारत यात्रा होगी — इससे पहले वह मई में क्वाड बैठक के सिलसिले में भारत आए थे।
विदेश विभाग के अनुसार, रूबियो भारत में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। बातचीत में अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर विचारों का आदान-प्रदान करने और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। वह व्यापारिक नेताओं से भी मिलेंगे, ताकि वाणिज्यिक निवेश और आर्थिक सहयोग के अवसरों को बढ़ावा दिया जा सके।
Marco Rubio India Visit: जामनगर का पड़ाव क्यों है खास
जामनगर का दौरा इस यात्रा का सबसे चर्चित हिस्सा है। गुजरात का यह शहर रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिफाइनिंग हब का घर है, जो दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग परिसरों में गिना जाता है और जिसकी क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। विदेश विभाग ने यह नहीं बताया कि जामनगर को क्यों चुना गया, लेकिन ऊर्जा सहयोग के एजेंडे को देखते हुए इसका संदेश साफ है।
दरअसल, इस साल मार्च में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास के ब्राउंसविले में 300 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना की घोषणा की थी, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की भागीदारी है। ट्रंप ने इसे 50 वर्षों में अमेरिका की पहली नई रिफाइनरी बताया था और दावा किया था कि यह अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा सौदा है। इस परियोजना में अमेरिकी शेल क्रूड के प्रसंस्करण की योजना है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब 18 अक्टूबर को ग्रैहम एक्ट के तहत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने की समयसीमा नजदीक है। 2022 से भारत रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में रहा है और यह मुद्दा वाशिंगटन के साथ लगातार खटास की वजह बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि भारत अपनी ऊर्जा खरीद में विविधता लाए।
गौरतलब है कि रूबियो की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते और टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही है। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से दोनों अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होने की उम्मीद है। जामनगर जैसे औद्योगिक केंद्र का चुनाव इस बात का संकेत है कि अमेरिका भारत की रिफाइनिंग क्षमता को अपनी ऊर्जा रणनीति में अहम मानता है।
समरकंद में C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक
भारत आने से पहले रूबियो समरकंद में C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज गणराज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से द्विपक्षीय मुलाकातें होंगी। उनके साथ 200 से अधिक व्यापारिक नेताओं का अमेरिकी वाणिज्यिक प्रतिनिधिमंडल भी होगा, जिसे विदेश विभाग ने अमेरिका और मध्य एशिया के बीच मजबूत वाणिज्यिक सहयोग के नए युग की शुरुआत बताया है।
कुल मिलाकर यह दौरा अमेरिका-भारत संबंधों में ऊर्जा को केंद्र में रखने का संकेत है। रूसी तेल, व्यापार असंतुलन और रिफाइनिंग साझेदारी जैसे मुद्दों पर होने वाली बातचीत के नतीजों पर दोनों देशों की पैनी नजर रहेगी।















