नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) की भारत में स्थित ₹2,032.81 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर लीं। ईडी के हेडक्वार्टर इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत की है। इस ED Seizure Reliance Power मामले में जब्त संपत्तियों में कंपनी के बैंक खातों में जमा रकम और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी शामिल है।
ईडी के आधिकारिक बयान के मुताबिक, जब्त की गई संपत्तियों का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है, जिसे कंपनी ने फेमा की धारा 4 के उल्लंघन में कथित तौर पर भारत के बाहर रखा हुआ था। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह जब्ती फेमा, 1999 की धारा 37ए के तहत की गई है।
सेबी की सूचना से शुरू हुई जांच
दरअसल, इस पूरे मामले की जड़ भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से मिली सूचना में है। सेबी ने ईडी को जानकारी दी थी कि रिलायंस पावर ने अपनी किताबों में ₹2,101.46 करोड़ का राइट-ऑफ और प्रावधान किया है। यह रकम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और एडवांस से जुड़ी थी।
इसी सूचना के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की और इसी साल 6 से 8 मार्च के बीच फेमा के तहत तलाशी अभियान चलाया गया। एजेंसी का दावा है कि तलाशी के दौरान आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए गए और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए। ईडी के मुताबिक, जांच में विदेशी फंड के इस्तेमाल का एक जटिल जाल सामने आया है।
सिंगापुर से जिनेवा तक पैसों का सफर
जांच में सामने आया कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (आरएनआरएल), जो अब रिलायंस पावर में विलीन हो चुकी है, ने 2006 में विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) के जरिए 30 करोड़ डॉलर जुटाए थे। इसमें से 27.5 करोड़ डॉलर कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर सहायक कंपनी आरएनआरएल (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड में निवेश किया गया।
ईडी के मुताबिक, सिंगापुर की सहायक कंपनी ने यह रकम जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (सुइस) एसए में जमा के तौर पर रखी। बाद में इन जमाओं को बीवीआई में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए कर्ज की गारंटी के रूप में इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ये बीवीआई कंपनियां असल में भारत से रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के निर्देशों पर काम करने वाले फ्रंट व्यक्तियों के जरिए नियंत्रित और प्रबंधित की जा रही थीं।
ED Seizure Reliance Power मामले में आगे क्या होगा
ईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और इसका दायरा और बढ़ सकता है। एजेंसी विदेश में रखी गई कथित विदेशी मुद्रा और उससे जुड़े लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अनिल अंबानी समूह की कंपनियां पहले से ही विभिन्न जांच एजेंसियों की नजर में हैं।
गौरतलब है कि फेमा के तहत इस तरह की जब्ती का मकसद भारत के बाहर कथित तौर पर रखी गई विदेशी मुद्रा के बराबर की संपत्ति को देश के भीतर सुरक्षित करना होता है। फिलहाल ईडी की इस कार्रवाई के बाद मामले की अगली कड़ी पर सबकी नजर टिकी है।















