मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक अन्य
हरिद्वार कुंभ 2027 — उत्तराखण्ड शासन

RBI repo rate hike: 5.50% हुआ रेपो रेट, वर्ल्ड बैंक ने भारत की ग्रोथ 7.1% तक बढ़ाई

On: October 11, 2026 5:06 PM
Follow Us:
RBI repo rate hike: 5.50% हुआ रेपो रेट, वर्ल्ड बैंक ने भारत की ग्रोथ 7.1% तक बढ़ाई
---Advertisement---
वित्तीय प्रबंधन में श्रेष्ठ प्रदर्शन — उत्तराखण्ड शासन

महंगाई से लड़ाई में भारतीय रिज़र्व बैंक ने सख्त रुख अपनाते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में 5 से 7 अक्टूबर तक चली 63वीं मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट (RBI repo rate) 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया गया है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है — और सभी छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से इसका समर्थन किया।

रेपो रेट के साथ ही एसडीएफ दर 5.25%, एमएसएफ दर 5.75% और बैंक रेट 5.75% हो गए हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने अपनी नीतिगत दिशा “न्यूट्रल” से बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” कर दी है — यानी साफ संदेश कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की गुंजाइश लगभग खत्म, आगे सिर्फ बढ़ोतरी या ठहराव ही विकल्प होंगे।

RBI repo rate hike: महंगाई पर चिंता क्यों बढ़ी

ब्याज दरें बढ़ाने के पीछे सबसे बड़ा कारण महंगाई का बढ़ता जोखिम है। अगस्त में रिटेल महंगाई (CPI) बढ़कर 4.82% हो गई थी, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर है। कोर महंगाई भी 4.2% से बढ़कर 4.4% के अनुमान पर पहुंच गई है। दरअसल, उपभोक्ता टोकरी का करीब आधा हिस्सा अब 4% से ऊपर महंगाई दर्ज कर रहा है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान भी 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। कारण साफ हैं — ईरान संघर्ष से जुड़े कच्चे तेल के ऊंचे भाव, कमज़ोर मानसून और एल निनो का असर, भू-राजनीतिक तनाव और कमज़ोर रुपया (डॉलर के मुकाबले करीब 96.36 रुपये)। गवर्नर मल्होत्रा ने साफ किया कि आगे नीतिगत कार्रवाई दर बढ़ाने या ठहराव तक ही सीमित रहेगी और वह महंगाई-ग्रोथ के आंकड़ों पर निर्भर होगी।

EMI पर असर: होम लोन और पर्सनल लोन महंगे होंगे

बढ़ी दरों का सीधा असर आम कर्ज़धारकों की जेब पर पड़ेगा। बैंकों की उधारी लागत बढ़ेगी और वह धीरे-धीरे कर्ज़दारों तक पहुंच जाएगी। एक उदाहरण लें — 50 लाख रुपये का 20 साल का होम लोन अगर 8% से बढ़कर 8.25% हो जाए तो EMI करीब 41,822 रुपये से बढ़कर 42,663 रुपये हो जाएगी। हालांकि इसका वास्तविक असर कर्ज़ के बेंचमार्क और फिक्स्ड-फ्लोटिंग दर पर निर्भर करेगा।

हालांकि राहत की बात यह है कि ग्रोथ का मोमेंटम मज़बूत बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, जबकि अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी थी — अनुमान से काफी ऊपर। यानी महंगाई की चिंता है, लेकिन घरेलू मांग और निवेश की तेज़ी केंद्रीय बैंक को सख्त कदम उठाने की गुंजाइश दे रही है। बाजार पर भी असर दिखा — फैसला आने के बाद 10 साल के बॉन्ड यील्ड 5 बेसिस पॉइंट बढ़कर 7.2655% हो गया, निफ्टी 0.6% और सेंसेक्स 0.7% लुढ़के। अगली MPC बैठक 2 से 4 दिसंबर को होगी, और अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद भी जता रहा है।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट: भारत को 7.1% ग्रोथ का भरोसा

RBI के फैसले से एक दिन पहले आई वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने भी भारत के प्रति भरोसा दिखाया है। वर्ल्ड बैंक ने अपने इंडिया डेवलपमेंट अपडेट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है — अप्रैल के अनुमान से 50 बेसिस पॉइंट ज़्यादा। FY28 में ग्रोथ 7.2% रहने का अनुमान है।

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, मज़बूत घरेलू मांग, उद्योग और सेवा क्षेत्र की रफ्तार इस ग्रोथ को सहारा देंगे। लेबर कोड समेकन, GST सुधार, टैरिफ युक्तिकरण, इंसॉल्वेंसी कानून और भौतिक-डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे बड़े सुधार लंबी अवधि की ग्रोथ के पंख बनेंगे। हालांकि पश्चिमी एशिया संघर्ष, कमज़ोर मानसून और वैश्विक व्यापार तनाव को जोखिम के रूप में भी चिन्हित किया गया है। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई औसतन 4.8% रहने का अनुमान लगाया है।

दोनों संस्थाओं की एक जैसी ग्रोथ रेटिंग दरअसल एक ही कहानी कहती है — भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ रफ्तार में है, लेकिन महंगाई का पहिया भी साथ-साथ घूम रहा है। आम लोगों के लिए इसका मतलब है कि EMI की राहत कुछ समय तक नज़र नहीं आएगी, भले ही ग्रोथ के आंकड़े अखबारों की सुर्खियां बनते रहें।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment