देश का सबसे बड़ा बनने जा रहा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट अब एक नए नाम से जाना जाएगा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का नाम बदलकर “Narendra Modi International Airport” करने का प्रस्ताव मंज़ूर कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में इस फैसले की घोषणा की — और इसके साथ ही एक साफ राजनीतिक संदेश भी दे दिया।
दरअसल, इस नामकरण के साथ यूपी मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निरंतर 25 वर्षों तक सरकार-मुखिया के रूप में सेवा पूरी होने का उत्सव भी मनाया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की मंत्रिपरिषद जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट “गिफ्ट” देने के लिए प्रधानमंत्री की आभारी है, और अब कैबिनेट ने इसका नाम “नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर” रखने का प्रस्ताव पारित कर दिया है।
Narendra Modi International Airport: भविष्य का सबसे बड़ा एविएशन हब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने जा रहा है और आगे चलकर देश का सबसे बड़ा एविएशन हब भी बनेगा। उनके मुताबिक, जेवर एयरपोर्ट राज्य की एविएशन कनेक्टिविटी को मज़बूत करेगा और अर्थव्यवस्था, उद्योग और पर्यटन को नई रफ्तार देगा।
बताया जा रहा है कि यह फैसला प्रधानमंत्री के योगदान को स्वीकार करने और राज्य के विकास, निवेश तथा कनेक्टिविटी में उनके मार्गदर्शन को सम्मान देने की दृष्टि से लिया गया है। मंत्रिपरिषद ने यह भी दोहराया कि 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के संकल्प को पूरी निष्ठा और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
2021 की नींव से 2026 की उड़ान तक
जेवर एयरपोर्ट का सफर भी अपने आप में एक कहानी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 25 नवंबर 2021 को इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट की नींव रखी थी। मार्च 2026 में प्रधानमंत्री ने इसके फेज-I का उद्घाटन किया और जून 2026 से यहां कमर्शियल उड़ानें शुरू हो गईं। यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जिसे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।
यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश सरकार और ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी के बीच पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में बन रहा है। फेज-I करीब 1,334 हेक्टेयर (3,300 एकड़ से ज़्यादा) भूमि में विकसित हुआ है और शुरुआत में यहां हर साल करीब 12 मिलियन यात्रियों की क्षमता है। पूर्ण विस्तार के बाद यह 5,000 हेक्टेयर से ज़्यादा क्षेत्र में फैलेगा — और इसे देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बताया जा रहा है। इसे अंतरराष्ट्रीय कोड DXN भी दिया जा चुका है।
25 साल के कार्यकाल पर कैबिनेट का प्रस्ताव
नामकरण के फैसले के साथ ही यूपी कैबिनेट ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के निरंतर नेतृत्व को लेकर एक प्रस्ताव भी पारित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में अयोध्या में राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास जैसे सांस्कृतिक प्रोजेक्ट साकार हुए, और राज्य की धरोहर तथा स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच मिला।
योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर राज्य के बुनियादी ढांचे के आंकड़े भी रखे। उनके अनुसार, 42 नेशनल हाईवे प्रोजेक्टों पर करीब 60,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो 2,483 किलोमीटर तक फैले हैं। दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को अहम कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट बताया गया। साथ ही 30,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत वाली दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत आरआरटीएस और लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा की मेट्रो परियोजनाओं का भी ज़िक्र हुआ।
जेवर एयरपोर्ट का नया नाम सिर्फ एक बोर्ड पर लिखे अक्षर नहीं है — यह यूपी सरकार के उस राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा है, जिसमें राज्य का विकास प्रधानमंत्री के नेतृत्व से जोड़ा जा रहा है। अब नज़र इस पर रहेगी कि केंद्र सरकार इस नाम प्रस्ताव को कब और कैसे औपचारिक स्वीकृति देती है, क्योंकि एयरपोर्ट के नाम में बदलाव को पूरी तरह अमल में लाने की प्रक्रिया अभी बाकी है।















