सस्ते गल्ले की दुकानों से मिलने वाले घटिया और खराब राशन की शिकायतें अब देहरादून जिला प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गई हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने इस बार राशन कोटेदारों पर कार्रवाई से पहले सप्लाई की जड़ पर ही चोट करने का फैसला लिया है। उन्होंने जनपद के सभी उपजिलाधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे खुद फील्ड में उतरकर सरकारी अन्न भंडारों में ‘ration checking’ करें और खाद्यान्न की गुणवत्ता को परखें। प्रशासन का रुख बिल्कुल साफ है — गोदाम के गेट से लेकर राशन की दुकान तक अब सिर्फ साफ और मानकों पर खरा उतरने वाला अनाज ही पहुंचेगा।
दरअसल, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि उचित दर दुकानों पर घुन लगा, सीलन भरा या सड़ा हुआ अनाज बांटा जा रहा है। ऐसे में जिलाधिकारी ने एसडीएम स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे केवल फाइलों पर भरोसा न करें, बल्कि औचक निरीक्षण के जरिए हकीकत को खुद देखें। गोदामों से दुकानों के लिए उठाए जा रहे गेहूं और चावल की बोरियों की रैंडम सैंपलिंग की जाएगी। जब तक खाद्यान्न तय सरकारी मानकों पर खरा नहीं उतरता, तब तक उसे कोटेदारों को नहीं सौंपा जाएगा।
एसडीएम खुद उतरेंगे गोदामों में, रैंडम सैंपलिंग से होगी ‘ration checking’
जिलाधिकारी के आदेश के मुताबिक, जनपद के हर उपजिलाधिकारी को अपने क्षेत्र के राजकीय अन्न भंडारों का औचक निरीक्षण करना होगा। निरीक्षण के दौरान गोदामों में रखे स्टॉक की गुणवत्ता की गहन पड़ताल की जाएगी। प्रशासन ने यह भी तय किया है कि राशन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए हर उचित दर दुकान की निगरानी का जिम्मा स्थानीय अधिकारियों को सौंपा जाएगा। ये अधिकारी वितरण के समय दुकानों पर मौजूद रहकर पूरी व्यवस्था पर नजर रखेंगे, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
इसके साथ ही उचित दर दुकानों में अनाज के सुरक्षित भंडारण और साफ-सफाई को लेकर भी कड़े मानक तय कर दिए गए हैं। दुकानों में नमी, गंदगी या कीटों से अनाज के खराब होने की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। अब प्रशासन चाहता है कि भंडारण से लेकर वितरण तक हर कड़ी में जवाबदेही तय हो।
कोटेदारों का पुराना बहाना अब नहीं चलेगा
जमीनी हकीकत यह रही है कि जब भी किसी सस्ते गल्ले की दुकान पर खराब अनाज पकड़ा जाता था, तो कोटेदार सारा ठीकरा सरकारी गोदामों पर फोड़ देते थे। उनका दावा होता था कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के गोदामों से ही उन्हें खराब माल भेजा गया है। डीएम के इस नए कदम ने इस बहाने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म कर दी है। जब एसडीएम स्तर के अधिकारी खुद अन्न भंडारों के स्टॉक को प्रमाणित करेंगे, तो सप्लाई चेन में गड़बड़ी करने वाले बिचौलियों और लापरवाह पूर्ति निरीक्षकों पर सीधी गाज गिरेगी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई इलाकों में राशन की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से असंतोष था, लेकिन शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती थी। अब जब जांच की शुरुआत ही गोदामों से हो रही है, तो लोगों को उम्मीद है कि दुकानों तक पहुंचने वाला अनाज पहले से बेहतर होगा।
सात दिन में डीएम को सौंपनी होगी पूरी रिपोर्ट
सार्वजनिक वितरण प्रणाली को चाक-चौबंद करने के लिए प्रशासन ने सख्त समयसीमा भी तय की है। जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों के गोदामों और कोटे की दुकानों का सघन निरीक्षण पूरा कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत आख्या जिला मुख्यालय को भेजें। इस रिपोर्ट में यह दर्ज होगा कि कितने गोदामों की जांच हुई, खाद्यान्न की गुणवत्ता कैसी पाई गई और दुकानों में साफ-सफाई के क्या इंतजाम हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत मिलने वाले सस्ते राशन में किसी भी तरह की मिलावट या घटिया अनाज पाए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। साफ है, इस बार राशन व्यवस्था में लापरवाही बरतने वालों के लिए कोई रियायत नहीं होगी।









