Uttarkashi Rescue Operation की खबर ने पूरे प्रदेश को चिंता में डाल दिया है। उत्तरकाशी जिले से सटे दुर्गम उच्च हिमालयी इलाकों में अचानक बदले मौसम और लगातार जारी भारी बर्फबारी के चलते विभिन्न अभियानों पर निकले 136 पर्वतारोही, ट्रेकर्स और सहयोगी पोर्टर बीच रास्ते में फंस गए हैं। हालात की गंभीरता देखते हुए जिला प्रशासन हरकत में आ गया है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सुरक्षा एजेंसियों के साथ आपात बैठक कर रेस्क्यू ऑपरेशन की रूपरेखा तय की। आपदा नियंत्रण कक्ष से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न अभियानों पर निकले कुल 136 लोगों में से 89 सदस्य हाई अल्टीट्यूड एक्सपीडिशन का हिस्सा हैं।
कालिंदी पास और ऑडन कोल में फंसे दल
इसके अलावा 14 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित बेहद जोखिम भरे कालिंदी पास बेस कैंप में 18 ट्रेकर और ऑडन कोल पास बेस कैंप में 29 सदस्य मौजूद हैं। इन दोनों ही ट्रेक रूटों को तकनीकी रूप से गढ़वाल हिमालय के सबसे कठिन और खतरनाक ट्रेक में गिना जाता है, जहां सितंबर के अंतिम सप्ताह में तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है।
फिलहाल इन सभी टीमों के गाइडों से सैटेलाइट फोन के जरिए संपर्क साधा गया है। राहत की बात यह है कि सभी दल तय बेस कैंपों के आसपास सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
Uttarkashi Rescue Operation: हर्षिल बना कंट्रोल सेंटर
ग्राउंड जीरो पर हालात की निगरानी और सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए अपर जिलाधिकारी (एडीएम) मुक्ता मिश्र प्रशासनिक अमले के साथ हर्षिल पहुंच रही हैं। हर्षिल को ही मुख्य फॉरवर्ड बेस बनाया गया है, ताकि रेस्क्यू सामग्री और राहत दल बिना समय गंवाए आगे बढ़ सकें।
सोमवार तड़के अगर आसमान साफ रहा तो सबसे पहले उच्च हिमालयी घाटियों में हेलीकॉप्टर से रेकी की जाएगी। उड़ान के लिए मौसम अनुकूल मिलते ही फंसे हुए लोगों को एयरलिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
प्रशासन किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने हर्षिल और भटवाड़ी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के साथ जरूरी जीवनरक्षक दवाएं और एंबुलेंस स्टैंडबाय पर रख दी हैं।
SDRF, NDRF और NIM के जांबाज अलर्ट मोड पर
इस पूरे अभियान में स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), एनडीआरएफ, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के प्रशिक्षित पर्वतारोहियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। जमीनी रास्ते से भी रेस्क्यू टीमें जरूरी राशन किट, पैक्ड फूड और थर्मल ब्लैंकेट लेकर आगे बढ़ने की तैयारी में हैं।
राज्य के निचले हिस्से जहां मूसलाधार बारिश से जूझ रहे हैं, वहीं गंगोत्री, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और ओम पर्वत की चोटियों पर लगातार बर्फ की चादर मोटी हो रही है, जिससे रास्ते बंद होने का खतरा बढ़ गया है।
दरअसल सितंबर के आखिरी हफ्ते में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज अचानक बदल जाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार बर्फबारी की तीव्रता ने प्रशासन को भी चौंका दिया है। इतनी ऊंचाई पर ठंड और ऑक्सीजन की कमी दोनों ही फंसे लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं, इसलिए प्रशासन हर घंटे हालात की समीक्षा कर रहा है।
प्रशासन का कहना है कि मौसम खुलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी ताकत से चलाया जाएगा और सभी 136 लोगों को सुरक्षित निकालना पहली प्राथमिकता है। पूरे प्रदेश की निगाहें अब आसमान के साफ होने पर टिकी हैं।












