यश की ‘Toxic movie’ जब सिनेमाघरों में उतरी थी, तो पहले दिन के 54.5 करोड़ रुपये के कलेक्शन ने ट्रेड पंडितों को हैरान कर दिया था। स्टारडम की इस आंधी को देखकर हर किसी को लगा था कि यश एक और ब्लॉकबस्टर देने जा रहे हैं। लेकिन कुछ ही हफ्तों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई — फिल्म की कमाई में तेज गिरावट आई और ट्रेड रिपोर्ट्स ने इसे ‘लूजिंग’ वेंचर करार दे दिया। अब ट्रेड एनालिस्ट Taran Adarsh ने फिल्म के प्रदर्शन पर खुलकर अपनी राय रखी है, जिससे इंडस्ट्री में नई बहस छिड़ गई है।
आदर्श ने यश की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें ‘very confident’ एक्टर बताया। उनके मुताबिक पर्दे पर यश की मौजूदगी में कोई कमी नहीं थी, लेकिन फिल्म की कमजोर लेखन यानी वीक राइटिंग ही इसकी असफलता की सबसे बड़ी वजह बनी। दरअसल, यह वही पुरानी कहानी है जो हिंदी सिनेमा में बार-बार दोहराई जाती है — स्टार पावर फिल्म को शानदार शुरुआत तो दिला सकती है, लेकिन कमजोर कहानी उसे लंबी रेस में टिकाए नहीं रख सकती।
रिकॉर्ड ओपनिंग, फिर कमाई में भारी गिरावट
ट्रेड आंकड़ों के मुताबिक ‘Toxic’ के हिंदी वर्जन ने ओपनिंग डे पर 54.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। यश की स्टार वैल्यू और फिल्म को लेकर बने हाइप ने शुरुआती दिनों में सिनेमाघरों में भारी भीड़ जुटाई। असल में, KGF फ्रेंचाइजी की सफलता के बाद यश से उम्मीदें आसमान पर थीं, और ओपनिंग ने उन उम्मीदों को शुरुआती तौर पर सही भी साबित किया। लेकिन दूसरे हफ्ते से ही कलेक्शन में तेज गिरावट दर्ज की गई, और फिल्म धीरे-धीरे सिनेमाघरों से सिमटने लगी। बताया जा रहा है कि फिल्म का कुल हिंदी कलेक्शन भारत में करीब 143.92 करोड़ रुपये पर जाकर ठहरा — जिस आंकड़े के आधार पर ट्रेड पंडितों ने फिल्म को ‘लूजिंग’ वर्डिक्ट दिया। यानी निवेश की तुलना में फिल्म घाटे का सौदा साबित हुई, और पहले दिन की धमाकेदार शुरुआत भी उसे बचा नहीं सकी।
‘Toxic movie’ की सबसे बड़ी कमी: कमजोर स्क्रिप्ट
Taran Adarsh का मानना है कि फिल्म की असफलता का ठीकरा यश के सिर नहीं फोड़ा जा सकता। उनके मुताबिक अभिनेता ने अपना काम पूरी शिद्दत से किया, लेकिन कहानी में वह दम नहीं था जो दर्शकों को बार-बार सिनेमाघर तक खींचकर लाए। फिल्म की माउथ पब्लिसिटी भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, और यही वजह रही कि धमाकेदार शुरुआत के बावजूद फिल्म का ग्राफ लगातार नीचे की ओर जाता रहा। ट्रेड जगत में अक्सर कहा जाता है कि ओपनिंग स्टार की होती है और लंबी कमाई कहानी की — ‘Toxic’ इसका ताजा उदाहरण बन गई है। कमजोर लेखन की वजह से फिल्म उन दर्शकों को भी बांधे नहीं रख सकी, जो पहले दिन टिकट खरीदकर सिनेमाघर पहुंचे थे।
स्टार-वाहन फिल्मों के लिए बड़ा सबक
ट्रेड एनालिस्टों के मुताबिक ‘Toxic’ की कहानी इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी की तरह है। बड़े बजट और बड़े स्टार के भरोसे बनाई जाने वाली फिल्मों को अब सिर्फ ओपनिंग के नंबरों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। आज के दर्शक पहले से कहीं ज्यादा समझदार हैं — वे सोशल मीडिया रिव्यू और माउथ पब्लिसिटी के आधार पर ही फिल्म देखने का फैसला लेते हैं। यश जैसे स्टार की फैन फॉलोइंग पहले दिन की भीड़ तो जुटा सकती है, लेकिन स्क्रीनप्ले और कहानी में दम न हो तो फिल्म टिक नहीं पाती। आदर्श की टिप्पणी ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि सिनेमा को स्टारडम से ज्यादा कंटेंट पर ध्यान देने की जरूरत है। यश के प्रशंसकों को अब उनकी अगली फिल्म से यही उम्मीद होगी कि स्टार पावर के साथ-साथ कहानी भी उतनी ही मजबूत हो।















