देहरादून में आम जनता और सरकारी तंत्र के बीच की दूरी पाटने के लिए सरकार अब सीधे मैदान में उतर आई है। शनिवार को राजधानी के तपोवन रोड स्थित क्षत्रिय चेतना मंच में उत्तराखंड में ‘Seva Sankalp Abhiyan Uttarakhand’ के तहत लगे वृहद बहुउद्देशीय शिविर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि विभिन्न विभागों के स्टॉलों पर जाकर जमीनी कामकाज को भी परखा।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कई जरूरतमंद लाभार्थियों को कृषि यंत्र, मशरूम उत्पादन की मिनी किट और महिला एवं बाल विकास विभाग की महालक्ष्मी व किशोरी किट अपने हाथों से सौंपी। लेकिन शिविर की सबसे बड़ी खबर वह संदेश था, जो सीएम ने प्रशासनिक अमले को दिया — जनता की समस्याओं का निपटारा तय समय के भीतर होना चाहिए, और किसी को अपनी जायज मांगों के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर बार-बार भटकना न पड़े।
अफसरों को सख्त संदेश — औपचारिकता नहीं, नतीजा चाहिए
शिविर के दौरान मुख्यमंत्री ने अफसरों को हिदायत दी कि जनता से मिलने वाले हर आवेदन और शिकायत को पूरी संवेदनशीलता के साथ लिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनसमस्याओं का समाधान कोई कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि सरकार का प्राथमिक दायित्व है। असल में, अगर किसी तकनीकी या नीतिगत कारण से समाधान में वक्त लगना तय है, तो फरियादी को अंधेरे में न रखा जाए — उसे स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी दी जाए। सीएम ने मंच से दोहराया कि शासन और जनता के बीच भरोसा तभी मजबूत होता है, जब तंत्र संवेदनशीलता के साथ सुनवाई करे।
17 सितंबर से चला आ रहा Seva Sankalp Abhiyan Uttarakhand, 6.5 लाख से ज्यादा की भागीदारी
इस पूरे अभियान की रूपरेखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस यानी 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे पहले प्रदेश में चलाए गए ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के दो चरणों में करीब 6.5 लाख से ज्यादा लोगों ने भागीदारी दर्ज कराई थी। उसी तर्ज पर अब कोशिश है कि पेंशन, राशन कार्ड, आय-जाति प्रमाण पत्र और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए बुजुर्गों और महिलाओं को तहसील या जिला मुख्यालयों की दौड़ न लगानी पड़े। शिविरों का मकसद सिर्फ स्टॉल सजाना नहीं, बल्कि मौके पर ही फैसले लेकर फाइलों को आगे बढ़ाना है।
स्वास्थ्य सुविधाएं भी केंद्र में, दिग्गज अधिकारी रहे मौजूद
स्वास्थ्य जांच, आयुष्मान कार्ड और अटल आयुष्मान उत्तराखंड जैसी सुविधाओं को भी इन कैंपों के केंद्र में रखा गया है, ताकि सुदूर इलाकों के लोगों को समय पर मुफ्त जांच और डॉक्टरी सलाह मिल सके। सरकार की मंशा साफ है — जानकारी का अभाव या कागजी पेचीदगी किसी भी पात्र नागरिक के हक में आड़े न आए। देहरादून के इस शिविर में स्थानीय विधायक उमेश शर्मा काऊ, डीएम डॉ. आशीष चौहान, एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे, एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल और सीडीओ अभिनव शाह समेत तमाम जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने आम लोगों से अपील की कि वे ऐसे आयोजनों में खुलकर अपनी बात रखें और जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। संदेश साफ है — सरकार अब जनता के द्वार तक पहुंच रही है, अब बारी अधिकारियों की है।









