15,225 फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध सिख तीर्थ स्थल श्री हेमकुंट साहिब के पावन कपाट शीतकाल के लिए विधिवत बंद कर दिए गए हैं। Hemkund Sahib kapat closed 2026 समारोह शनिवार, 10 अक्टूबर को कड़ाके की ठंड और हल्की बर्फबारी के बीच संपन्न हुआ, जिसमें करीब 5,000 श्रद्धालुओं की मौजूदगी में इस वर्ष की यात्रा की अंतिम अरदास हुई।
अंतिम अरदास के तुरंत बाद ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के गगनभेदी जयकारों के बीच पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सेना के बैंड की धुन और पूरे सत्कार के साथ उनके शीतकालीन निवास सचखंड में सुशोभित किया गया। इस पावन शोभायात्रा की अगुवाई भारतीय सेना की गढ़वाल स्काउट्स के बैंड और 418 इंडिपेंडेंट इंजीनियर कोर के जांबाज जवानों ने की।
Hemkund Sahib kapat closed 2026: सुखमनी साहिब पाठ से शुरुआत
शनिवार सुबह कपाट बंदी समारोह की शुरुआत सुखमनी साहिब के पाठ से हुई। इसके बाद सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब (दरबार साहिब), अमृतसर से पहुंचे हज़ूरी रागी भाई गुरदियाल सिंह और उनके जत्थे ने शबद कीर्तन पेश कर संगत को निहाल किया। दोपहर में इस यात्रा सत्र की अंतिम अरदास पूरी होने के बाद गुरु ग्रंथ साहिब जी को भव्य शोभायात्रा के साथ सचखंड ले जाया गया।
जवानों ने पूरे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सुरक्षा घेरा संभाला और उच्च हिमालयी क्षेत्र में उमड़ी भारी भीड़ का सुगम प्रबंधन किया। दरअसल, शुक्रवार से ही हेमकुंट साहिब और लोकपाल झील के आसपास के इलाकों में मौसम ने करवट ले ली थी और बर्फबारी शुरू हो गई थी। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और माइनस तापमान में भी संगत कतारबद्ध होकर दर्शन में डटी रही।
पाकिस्तान समेत दुनिया भर से पहुंची संगत
इस वर्ष श्री हेमकुंट साहिब यात्रा में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचे। कपाट बंदी के मौके पर संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई से आए तीर्थयात्री मौजूद रहे।
इस बार के समारोह का सबसे अहम पहलू पाकिस्तान से पहुंचे 48 तीर्थयात्रियों के जत्थे की मौजूदगी रही, जिन्होंने दुर्गम चढ़ाई पार कर पवित्र दरबार में मत्था टेका और कपाट बंदी के गवाह बने। बताया जा रहा है कि सरहद पार से आए इन श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा भावनात्मक रूप से बेहद खास रही।
ग्रीष्म 2027 में फिर खुलेंगे कपाट
गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन सरदार नरिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने सफल यात्रा संचालन के लिए भारतीय सेना, उत्तराखंड सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि दुर्गम भूगोल और विषम मौसम के बीच सुरक्षा बलों व सेवादारों के समर्पण से ही यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो सकी।
ट्रस्ट ने यात्रियों के लिए अपडेट देते हुए बताया कि अब बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित रतूड़ा गुरुद्वारा भी संगत के लिए खोल दिया गया है, जिससे आगे आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को विश्राम और लंगर की सीधी सुविधा मिलेगी। श्री हेमकुंट साहिब के कपाट अब शीतकाल भर बंद रहेंगे और अगले वर्ष ग्रीष्मकाल 2027 में दोबारा खोले जाएंगे।
दरअसल, हेमकुंट साहिब की यात्रा सिख धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में गिनी जाती है, और हर साल लाखों श्रद्धालु इस दुर्गम यात्रा को पूरा करते हैं। 15 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और अप्रत्याशित मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का जत्था हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। इस बार कपाट बंदी के मौके पर विदेशों से आई संगत की बड़ी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि हेमकुंट साहिब की आस्था सरहदों से परे है।









