देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन की संघर्ष गाथा और शहीदों की शहादत को याद करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून कचहरी परिसर स्थित शहीद स्थल पहुंचकर राज्य आंदोलनकारियों (Uttarakhand statehood martyrs tribute) को श्रद्धांजलि अर्पित की। आंदोलनकारियों के चित्रों पर श्रद्धासुमन चढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के अतुलनीय संघर्ष, त्याग और बलिदान के बूते ही पृथक उत्तराखंड राज्य का गठन संभव हो सका था। नम आंखों से अमर बलिदानियों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कुर्बानियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी।
दरअसल, हर वर्ष 2 अक्टूबर को कचहरी स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है, जहां शासन-प्रशासन के साथ आम जनमानस भी राज्य आंदोलन के बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करता है। इस बार मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने इस समारोह को विशेष महत्व दे दिया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास भी शहीद स्थल पर उपस्थित रहे और उन्होंने भी अमर बलिदानियों को पुष्पांजलि दी। इसके अलावा कई पूर्व आंदोलनकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने शहीदों के चित्रों पर पुष्प चढ़ाकर उन्हें नमन किया।
Uttarakhand statehood martyrs tribute: खून से लिखी आंदोलन की कहानी
उत्तराखंड राज्य निर्माण के दौरान रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर कांड) और खटीमा-मसूरी गोलीकांड जैसे काले अध्यायों में अनगिनत आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। शहीद स्थल पर खड़े होकर इन घटनाओं को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथक राज्य की मांग को लेकर चला यह आंदोलन किसी एक दिन या एक घटना का नतीजा नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष और बलिदान की परिणति था। कार्यक्रम में मौजूद पूर्व आंदोलनकारियों ने भी उन दिनों को याद किया, जब पहाड़ के लोग अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार शहीद स्थल पर हर साल होने वाली यह श्रद्धांजलि सभा नई पीढ़ी को आंदोलन के इतिहास से जोड़ने का काम करती है। कचहरी परिसर में स्थित यह स्मारक उन सभी ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों की याद दिलाता है, जिनके संघर्ष के बिना आज का उत्तराखंड संभव नहीं होता। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर वहां मौजूद लोगों ने राज्य आंदोलन के नारों के साथ शहीदों को याद किया।
आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए संवेदनशील सरकार
शहीदों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार आंदोलनकारियों एवं शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों के मान-सम्मान और सामाजिक-आर्थिक कल्याण के प्रति पूरी संवेदनशीलता से काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य निर्माण की लड़ाई केवल एक भौगोलिक सीमा तय करने की नहीं, बल्कि एक सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के सपने को धरातल पर उतारने की थी। सरकार की कोशिश है कि आंदोलनकारियों के उस सपने को हर नीति और हर फैसले में जगह मिले।
शहीदों के विजन को पूरा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों के उस विजन के अनुरूप एक समृद्ध, पारदर्शी और विकसित राज्य गढ़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्रद्धांजलि सभा के समापन पर सभी ने शहीदों के सपनों के उत्तराखंड को साकार करने का संकल्प दोहराया। कैबिनेट मंत्री खजान दास ने भी कहा कि आंदोलनकारियों का सम्मान सरकार की प्राथमिकता है। कुल मिलाकर यह आयोजन एक बार फिर इस बात की याद दिला गया कि उत्तराखंड की नींव में जिन बलिदानियों का खून-पसीना है, उन्हें भुलाया नहीं जा सकता।









