शुक्रवार सुबह ठीक 11 बजे उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ सायरन गूंज उठे। यह कोई आपात स्थिति नहीं थी, बल्कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए स्थापित ‘भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली’ (EEWS) का राज्यव्यापी परीक्षण था। Uttarakhand Earthquake Siren के इस मॉक ड्रिल में राज्यभर में स्थापित 112 सायरनों से चेतावनी ध्वनि प्रसारित की गई, वहीं नागरिकों के मोबाइल फोन पर संचालित ‘भूदेव’ ऐप पर भी परीक्षण अलर्ट प्राप्त हुआ।
इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य प्रणाली की तकनीकी तत्परता की जांच करना और आम जनता को सायरन की ध्वनि व आपात प्रक्रिया से परिचित कराना था। यानी जब कभी असली खतरा आए, तो लोग सायरन की आवाज पहचानकर तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर बढ़ सकें। दरअसल, भूकंप के चंद सेकंड पहले मिलने वाली चेतावनी ही कई जिंदगियां बचा सकती है और इसी तैयारी को परखने के लिए यह अभ्यास किया गया।
हर माह की 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा Uttarakhand Earthquake Siren
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देशों के क्रम में यह व्यवस्था अब एक स्थाई अभ्यास का रूप ले चुकी है। प्रशासनिक आदेश के तहत प्रत्येक माह की 09 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे सायरन बजाकर इस चेतावनी तंत्र की सक्रियता परखी जाएगी। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, इस नियमित परीक्षण का लाभ यह होगा कि किसी भी उपकरण या संचार नेटवर्क में आने वाली खामी तुरंत पकड़ में आ जाएगी और वास्तविक आपदा की स्थिति में तंत्र पूरी सटीकता के साथ कार्य कर सकेगा।
SEOC से हुई लाइव निगरानी, IIT रुड़की रहा तकनीकी साझेदार
देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की उपस्थिति में पूरी प्रक्रिया की निगरानी की गई। इस दौरान परियोजना के तकनीकी साझेदार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के वैज्ञानिक ऑनलाइन माध्यम से केंद्र से जुड़े रहे। वैज्ञानिकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सायरन बजने के समय, प्रसारण गति और मोबाइल ऐप पर प्राप्त संदेशों के टाइम-स्टैम्प का विस्तृत अवलोकन किया।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने परीक्षण के बाद जानकारी दी कि प्रणाली का समग्र संचालन काफी हद तक संतोषजनक और सफल रहा है। हालांकि, कुछ चिन्हित स्थानों पर सायरन बजने में तकनीकी व्यवधान दर्ज किए गए हैं। इन कमियों को IIT रुड़की के तकनीकी दल द्वारा सूचीबद्ध किया जा रहा है और शीघ्र ही स्थलवार जांच कर सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
169 सेंसरों से लैस है नेटवर्क, अतिरिक्त इकाइयों का प्रस्ताव गतिमान
वर्तमान में उत्तराखंड के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियों की त्वरित पहचान के लिए 169 अत्याधुनिक सेंसर और त्वरित चेतावनी के लिए 112 सायरन क्रियाशील हैं। सचिव ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और IIT रुड़की के संयुक्त तत्वावधान में इस नेटवर्क का और अधिक विस्तार करने की योजना पर कार्य चल रहा है। राज्य में अतिरिक्त सेंसर स्थापित करने का औपचारिक प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है, जिससे भूगर्भीय हलचल की पहचान और चेतावनी प्रसारण के समय में कुछ और महत्वपूर्ण सेकंडों की बचत की जा सकेगी।
नागरिकों से अपील: ‘भूदेव’ ऐप हमेशा अपडेट रखें।
आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि शुक्रवार को बजाए गए सायरन केवल एक पूर्व-निर्धारित तकनीकी अभ्यास का हिस्सा थे, किसी वास्तविक खतरे का संकेत नहीं। इसके साथ ही आमजन से अपील की गई है कि वे अपने स्मार्टफोन में ‘भूदेव’ मोबाइल एप्लिकेशन का नवीनतम संस्करण डाउनलोड रखें और उसमें ‘लोकेशन’ की अनुमति अनिवार्य रूप से सक्रिय रखें। वास्तविक भूकंपीय हलचल की स्थिति में यह ऐप व्यक्ति के सटीक भौगोलिक स्थान के आधार पर तुरंत अलर्ट जारी करता है, जिससे सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए बहुमूल्य समय मिल पाता है।
परीक्षण के दौरान SEOC में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) DIG राजकुमार नेगी तथा संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा सहित तकनीकी दल के सदस्य उपस्थित रहे। नियमित अभ्यास से यह तय होगा कि जब असली आपदा आए, तो चेतावनी तंत्र बिना किसी चूक के काम करे और हर नागरिक तक समय पर अलर्ट पहुंचे।












