देहरादून। उत्तराखंड मंत्रिमंडल की रविवार को हुई बैठक में प्रदेश के भविष्य से जुड़े 24 अहम प्रस्तावों पर मुहर लग गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में यह बैठक चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी गेस्ट हाउस में हुई, जो अपने आप में ऐतिहासिक रही — सूबे के इतिहास में पहली बार कैबिनेट की बैठक देहरादून से बाहर आयोजित की गई। बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षा, कृषि और भू-कानून तक, हर मोर्चे पर ठोस फैसले लिए गए। Uttarakhand Cabinet Decisions की इस मैराथन बैठक से साफ हो गया है कि सरकार पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता को रफ्तार देने के मूड में है।
बैठक में पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तार से लेकर छात्रों के कौशल विकास तक की योजनाओं पर फैसले हुए। दरअसल, सरकार की कोशिश है कि कनेक्टिविटी बढ़े, निवेश आए और युवाओं को रोजगार के नए रास्ते मिलें।
पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार को ₹66.29 करोड़ की मंजूरी
राज्य में कनेक्टिविटी और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तारीकरण से जुड़ा अहम फैसला लिया। हस्तांतरित परिसंपत्तियों के एवज में उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को 66.29 करोड़ रुपये की अवशेष राशि जारी करने की मंजूरी दी गई। यह राशि कॉरपोरेशन की कार्ययोजना के मुताबिक नवनिर्माण और अन्य तयशुदा कार्यों पर खर्च होगी।
इसके साथ ही नियोजन विभाग के तहत एक और बड़ा कदम उठाया गया। अब सार्वजनिक अभिकरणों की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से मिलने वाली आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित अभिकरणों को ही मिलेगा। असल में इस प्रावधान का मकसद यही है कि विकास कार्यों के लिए धन की कमी न रहे और एजेंसियां अपनी परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।
Uttarakhand Cabinet का युवाओं और किसानों पर खास फोकस
युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना, 2026’ को हरी झंडी मिल गई। राज्य के राजकीय और निजी विश्वविद्यालयों तथा उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा, और अगले पांच वर्षों में इस पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
कृषि और पशुपालन क्षेत्र को लेकर भी दो अहम फैसले हुए। कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना की भुगतान व्यवस्था बदल दी गई है — अब यह सब्सिडी सीबीडीसी या ई-रूपी के बजाय सीधे लाभार्थियों के आधार-सीडेड बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। इसके अलावा पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों में बेहतर समन्वय के लिए महानिदेशक का एक नया पद भी सृजित किया गया है।
संपत्ति लेनदेन में PAN जरूरी, नया सिंचाई विधेयक आएगा
कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट के लिहाज से कैबिनेट ने कई कड़े कदम उठाए। अब संपत्ति की खरीद-फरोख्त के दौरान खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए पैन कार्ड का सत्यापन अनिवार्य होगा, जिससे फर्जी दस्तावेजों और टैक्स चोरी पर लगाम लगने की उम्मीद है। वहीं जनपद नैनीताल के लालकुआं और देहरादून के जौनसार-बावर परगना में वर्ग-3 व वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों और कब्जाधारकों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार देने का रास्ता साफ कर दिया गया।
आपदा प्रबंधन के लिए कुमाऊं और गढ़वाल के मुख्य वन संरक्षकों को विभागाध्यक्ष घोषित किया गया, ताकि वनाग्नि-बाढ़ जैसी आपात स्थितियों में मैदानी स्तर पर फैसले तेज हों। निजी विश्वविद्यालयों के मानकों में भी संशोधन हुआ — पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम 2,500 और मैदानी क्षेत्रों में 20,000 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र अनिवार्य होगा।
ब्रिटिशकालीन उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873 को पूरी तरह निरस्त कर उसकी जगह राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल ‘उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026’ विधानसभा के पटल पर लाने का निर्णय लिया गया। साथ ही राजकोषीय अनुशासन के लिए ‘उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी गई, जिसके तहत 2031 तक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी के 3 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रावधान है।
कुल मिलाकर, बनबसा की इस बैठक ने विकास योजनाओं, प्रशासनिक सुधारों और वित्तीय अनुशासन को एक साथ नई दिशा दे दी। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जमीन पर इन फैसलों का अमल कितनी तेजी से होता है।









