देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर घमासान छिड़ गया है। राज्य में वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के बाद करीब नौ लाख नाम कम होने पर विपक्षी दलों के आरोपों का भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है। पार्टी का साफ कहना है कि त्रुटिहीन और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार होने से कांग्रेस पार्टी अपनी तय हार को लेकर आशंकित हो चुकी है।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने विपक्ष के दावों को सिरे से खारिज किया। उनका दावा है कि सूची से हटाए गए नाम अवैध और घुसपैठियों के थे, और साफ-सुथरी वोटर लिस्ट से कांग्रेस की बौखलाहट सामने आ रही है।
पर्वतीय जिलों में सबसे ज्यादा नाम घटने का तर्क
सुरेश जोशी ने बताया कि कांग्रेस पहले यह दावा कर रही थी कि किसी विशेष वर्ग के बहुल क्षेत्रों को निशाना बनाकर उनके नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। हालांकि, जमीनी सच्चाई इसके विपरीत है, क्योंकि सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम पर्वतीय जिलों में कम हुए हैं, जहां उन समुदायों की संख्या बेहद कम है। भाजपा के मुताबिक, इस तथ्य के सामने आने के बाद विपक्षी दलों के सभी दावे बेबुनियाद साबित होते हैं।
प्रवक्ता ने आगे कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का पूरा काम तय नियमों, मानकों और चरणों के तहत ही पूरा किया गया है। यदि किसी वैध मतदाता का नाम गलती से सूची से छूट गया है, तो उसके लिए निर्वाचन आयोग की तरफ से स्पष्ट और सुगम प्रक्रिया निर्धारित की गई है। राजनीतिक मंचों से बयानबाजी करने के बजाय उन औपचारिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास का आरोप
बिना किसी ठोस प्रमाण के तकनीकी व्यवस्थाओं और संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास का माहौल बनाना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है, ऐसा भाजपा का कहना है। सुरेश जोशी ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर बेवजह सवाल उठाने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता।
गौरतलब है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद राज्य में करीब नौ लाख नाम कम हुए हैं, जिसके बाद विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने पहले आरोप लगाया था कि किसी विशेष वर्ग के बहुल क्षेत्रों को निशाना बनाकर नाम हटाए जा रहे हैं, लेकिन भाजपा का कहना है कि पर्वतीय जिलों के आंकड़े इस दावे की पोल खोलते हैं।
दरअसल, SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सूची को त्रुटिहीन और अद्यतन बनाना है। भाजपा का तर्क है कि इसी शुद्धिकरण से पारदर्शी चुनाव की नींव मजबूत होती है, और इस पर राजनीति करना लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने जैसा है।
इंडी गठबंधन पर राजनीतिक अस्तित्व बचाने का हमला
भाजपा ने इंडी गठबंधन पर भी कड़ा प्रहार किया। पार्टी का आरोप है कि विपक्षी दल ‘लोकतंत्र बचाओ’ के नाम पर जनता को भ्रमित करने की राजनीति कर रहे हैं। असलियत यह है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख बौखलाहट में निराधार दावे कर रहे हैं।
जोशी ने कहा कि जनता अब कोरे नारों और बिना तथ्यों के लगाए गए इल्जामों के झांसे में आने वाली नहीं है, क्योंकि हर नागरिक पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का समर्थन करता है। भाजपा के मुताबिक, मतदाता सूची के शुद्धिकरण से लोकतंत्र और मजबूत होगा।









